संसद में महिलाओं की भागीदारी को लेकर एक अहम मुद्दा उठाया गया, जिस पर सरकार ने चौंकाने वाला जवाब दिया। Lok Sabha में सरकार ने बताया कि देश की 179 सरकारी कंपनियों के बोर्ड में एक भी महिला निदेशक नहीं है। यह आंकड़ा सामने आने के बाद कॉरपोरेट गवर्नेंस और जेंडर प्रतिनिधित्व को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि महिला निदेशकों की नियुक्ति के लिए नियम और दिशानिर्देश मौजूद हैं, लेकिन कई कंपनियां अभी भी इनका पूरी तरह पालन नहीं कर पा रही हैं। इस मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण के दावों के बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बोर्ड स्तर पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना जरूरी है, ताकि निर्णय प्रक्रिया में विविधता आ सके।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देश में महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। आने वाले समय में सरकार इस दिशा में क्या ठोस कदम उठाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।


