रायपुर में अंधविश्वास का खौफनाक खेल! जादू-टोने के शक में बुजुर्ग दंपती की हत्या, आरोपी गिरफ्तार
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के आरंग क्षेत्र में एक ऐसी वारदात सामने आई है, जिसमें अंधविश्वास और बदले की भावना ने दो बुजुर्गों की जान ले ली। बिरबिरा गांव में 65 वर्षीय सदाशी साहू और उनकी 62 वर्षीय पत्नी आसबती साहू की घर में घुसकर हत्या कर दी गई। पुलिस के मुताबिक, पड़ोस में रहने वाले 22 वर्षीय प्रमोद उर्फ रॉकी साहू को संदेह था कि दंपती ने जादू-टोना करके उसकी मां की मौत का कारण बनाया है। इसी शक के चलते उसने कथित तौर पर दोनों पर हमला किया।
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उसकी निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल किए गए हथियारों तथा कथित तौर पर लूटे गए सोने-चांदी के आभूषणों को बरामद करने की जानकारी दी है। मामले में छत्तीसगढ़ टोनही प्रताड़ना अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गई हैं।
इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि एक अप्रमाणित धारणा को सच मानकर दो लोगों की जान लेने का आरोप है। गांवों में जादू-टोने के नाम पर संदेह, डर और व्यक्तिगत दुश्मनी किस तरह हिंसा का रूप ले सकती है, यह मामला उसी खतरे की ओर ध्यान खींचता है।
मां की मौत के बाद पड़ोसी पर करने लगा शक
पुलिस के अनुसार, आरोपी अपनी मां की करीब एक साल पहले हुई मौत के लिए बुजुर्ग दंपती को जिम्मेदार मानने लगा था। उसे संदेह था कि दोनों ने जादू-टोना किया था। हालांकि, किसी व्यक्ति की बीमारी या मौत के लिए इस तरह के आरोप लगाना अपने आप में किसी अपराध का प्रमाण नहीं है।
जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, 6 अक्टूबर की रात सदाशी साहू और उनकी पत्नी खाना खाने के बाद अपने घर में सो रहे थे। इसी दौरान आरोपी कथित तौर पर छत के रास्ते उनके घर में दाखिल हुआ और दोनों पर धारदार हथियारों से हमला कर दिया।
वारदात के बाद आरोपी के महिला के आभूषण लेकर फरार होने का भी आरोप है। पुलिस मामले में हत्या के पीछे की परिस्थितियों और घटनाक्रम की जांच कर चुकी है तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की गई है।
दो दिन बाद सामने आई वारदात, गांव में फैली सनसनी
जानकारी के अनुसार, 8 अक्टूबर को गांव के सरपंच चम्मन लाल साहू ने पुलिस को घर में बुजुर्ग दंपती की हत्या होने की सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस को दोनों के शव अलग-अलग कमरों में मिले।
घटना की गंभीरता को देखते हुए डॉग स्क्वाड और फॉरेंसिक साइंस टीम को बुलाया गया। घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य जांच के लिए महत्वपूर्ण रहे। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर कथित तौर पर वारदात में इस्तेमाल किए गए हथियार, खून के निशान वाली जींस और आभूषण बरामद किए।
आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। अब मामले में जुटाए गए साक्ष्यों, पुलिस की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर आरोपों का परीक्षण होगा।
खेती-किसानी कर परिवार चलाते थे बुजुर्ग दंपती
सदाशी साहू और आसबती साहू खेती-किसानी से जुड़े थे। बताया गया है कि उनके पास करीब 10 एकड़ कृषि भूमि थी। उनके दो बेटे रायपुर में रहकर काम करते हैं, जबकि दोनों बेटियों की शादी हो चुकी है।
जिस घर में परिवार के बुजुर्ग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी बिता रहे थे, उसी घर में इस तरह की हिंसक घटना होना पूरे परिवार के लिए गहरा आघात है। ग्रामीण इलाकों में पड़ोसियों के बीच लंबे समय से परिचय और सामाजिक संबंध होने के बावजूद ऐसी घटनाएं सुरक्षा और आपसी विश्वास को लेकर चिंता पैदा करती हैं।
अंधविश्वास के खिलाफ कानून के साथ जागरूकता भी जरूरी
इस मामले का सामाजिक पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है। किसी की मृत्यु के बाद दुख, भय या असहायता के कारण लोग कभी-कभी उसके लिए किसी व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराने लगते हैं। लेकिन जादू-टोने के आरोप वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं और इनके आधार पर किसी को प्रताड़ित करना या हिंसा करना कानूनन गंभीर अपराध बन सकता है।
छत्तीसगढ़ में टोनही प्रताड़ना से संबंधित कानून का उद्देश्य इसी तरह के आरोपों के आधार पर होने वाली प्रताड़ना और हिंसा को रोकना है। इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता, समय पर पुलिस को सूचना और अंधविश्वास से जुड़े विवादों पर त्वरित हस्तक्षेप भी जरूरी है।
यदि किसी परिवार में बीमारी, मृत्यु या किसी अन्य घटना को लेकर संदेह पैदा होता है, तो उसका समाधान चिकित्सा, जांच और कानूनी प्रक्रिया के जरिए होना चाहिए। अफवाहों और अप्रमाणित मान्यताओं के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी मान लेना निर्दोष लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
आगे की जांच में किन बातों पर रहेगी नजर?
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और बरामदगी की जानकारी दी है। अब मामले में साक्ष्यों की जांच, घटनाक्रम की पुष्टि और अदालत में आरोपों के परीक्षण की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
बिरबिरा गांव की यह घटना केवल एक आपराधिक मामले तक सीमित नहीं है। यह याद दिलाती है कि अंधविश्वास से उपजा संदेह जब हिंसा में बदलता है, तो उसका परिणाम पूरे परिवार और समाज को भुगतना पड़ता है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कानून का सख्त पालन, सामाजिक जागरूकता और समय रहते शिकायतों पर कार्रवाई बेहद जरूरी है।



