लोकसभा चुनाव के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi के चुनावी दौरे पर चर्चा तेज है। आंकड़ों के मुताबिक पीएम मोदी ने इस बार पश्चिम बंगाल को छोड़कर किसी भी राज्य में पांच से ज्यादा रैलियां नहीं कीं, जबकि West Bengal में उन्होंने लगातार कई दौरों के जरिए पार्टी के लिए माहौल बनाने की कोशिश की। इसे Bharatiya Janata Party की रणनीतिक प्राथमिकता के तौर पर देखा जा रहा है, जहां पार्टी पिछले चुनाव की तुलना में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिन क्षेत्रों में पीएम मोदी ने खुद प्रचार किया, वहां बीजेपी को सीधे लाभ मिलने की संभावना रहती है। पार्टी इन सीटों को “हाई-इम्पैक्ट सीट” मानकर चल रही है, जहां प्रधानमंत्री की रैलियों से कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ता है और वोटरों पर असर पड़ता है। खासकर बंगाल में उनकी लगातार मौजूदगी से यह संकेत दिया गया कि पार्टी राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरा जोर लगा रही है।
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हालांकि अंतिम नतीजे कई स्थानीय समीकरणों पर भी निर्भर करेंगे। विपक्षी दलों का दावा है कि केवल हाई-प्रोफाइल प्रचार से चुनाव नहीं जीते जाते, जबकि बीजेपी इसे “मोदी फैक्टर” मान रही है। अब नजर उन सीटों पर है जहां प्रधानमंत्री ने सीधे प्रचार किया—क्या यह रणनीति चुनावी नतीजों में बदल पाएगी, इसका जवाब मतगणना के दिन ही मिलेगा।


