नई दिल्ली/तेल अवीव: नरेंद्र मोदी का इजरायल दौरा रणनीतिक और कूटनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। इस यात्रा के जरिए भारत और इजरायल चार बड़े संदेश देने की तैयारी में हैं—पहला, रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करना; दूसरा, आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति; तीसरा, कृषि, साइबर टेक्नोलॉजी और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में साझेदारी का विस्तार; और चौथा, पश्चिम एशिया में स्थिरता के लिए संतुलित कूटनीति का समर्थन।
सूत्रों के मुताबिक, इस दौरे के दौरान उच्च स्तरीय वार्ताएं होंगी जिनमें रक्षा सौदों, खुफिया साझेदारी और तकनीकी सहयोग पर चर्चा संभव है। भारत लंबे समय से इजरायल का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार रहा है और दोनों देशों के संबंध पिछले एक दशक में नई ऊंचाइयों पर पहुंचे हैं।
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इस पूरी प्रक्रिया में संयुक्त राज्य अमेरिका की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। अमेरिका, इजरायल का पारंपरिक सहयोगी है और भारत के साथ भी उसकी रणनीतिक साझेदारी गहरी है। ऐसे में त्रिपक्षीय संतुलन और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर अमेरिका की कूटनीतिक सक्रियता पर नजर रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीति में भारत की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करेगा।


