पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के हालिया फैसले को लेकर सियासी और खेल जगत में चर्चाएं तेज हो गई हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि 12 फरवरी के बाद पीसीबी प्रमुख नकवी अपने कड़े रुख पर यू-टर्न ले सकते हैं। खासतौर पर मैच के बहिष्कार को लेकर लिया गया फैसला अब सवालों के घेरे में है, क्योंकि इसके पीछे सिर्फ क्रिकेट नहीं, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति के संकेत भी देखे जा रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक पीसीबी के इस रुख को बांग्लादेश में होने वाले चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि चुनावी माहौल और कूटनीतिक समीकरणों के चलते क्रिकेट को दबाव की रणनीति के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि आधिकारिक तौर पर पीसीबी ने ऐसे किसी राजनीतिक कनेक्शन से इनकार किया है, लेकिन समय और परिस्थितियां कई सवाल खड़े कर रही हैं।
अगर 12 फरवरी के बाद पीसीबी अपने फैसले में बदलाव करता है तो यह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर और संबंधित टीमों के लिए राहत की खबर हो सकती है। फिलहाल क्रिकेट फैंस और बोर्ड्स की नजरें नकवी के अगले कदम पर टिकी हैं, क्योंकि इस फैसले का असर सिर्फ एक सीरीज या मैच तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे एशियाई क्रिकेट पर पड़ सकता है।


