सामाजिक सम्मान और पेशों की नई पहचान को बढ़ावा देने के लिए Parliamentary Standing Committee on Social Justice and Empowerment ने एक महत्वपूर्ण सिफारिश की है। समिति ने सुझाव दिया है कि पारंपरिक रूप से जाति से जुड़े पेशों को नई पेशेवर पहचान दी जाए। इसके तहत मोची को “जूते का कारीगर” और नाई को “सौंदर्य सेवा प्रदाता” कहा जाए, ताकि समाज में इन पेशों को सम्मानजनक रूप से देखा जा सके और लोगों की पहचान जाति से नहीं बल्कि उनके हुनर से हो।
समिति का मानना है कि समय के साथ समाज में बदलाव आ रहा है और पेशों को जाति से जोड़कर देखने की प्रवृत्ति को खत्म करना जरूरी है। इस पहल का उद्देश्य ऐसे पेशों से जुड़े लोगों को सामाजिक सम्मान दिलाना और नई पीढ़ी को कौशल आधारित पहचान की ओर प्रेरित करना है। समिति ने सरकार से सुझाव दिया है कि इन नए नामों को सरकारी दस्तावेजों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और कौशल विकास योजनाओं में भी शामिल किया जाए।
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विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन सिफारिशों को लागू किया जाता है तो इससे पारंपरिक पेशों से जुड़े लाखों लोगों की सामाजिक छवि बेहतर हो सकती है। साथ ही यह कदम कौशल आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और समाज में समानता की भावना को मजबूत करने की दिशा में भी अहम साबित हो सकता है।


