नासा ने एक बार फिर विज्ञान की दुनिया में इतिहास रच दिया है। इसका परसेवरेंस रोवर मंगल ग्रह पर एआई (Artificial Intelligence) की मदद से खुद-ब-खुद गाड़ी चला रहा है, जो मंगल अन्वेषण में एक नया मील का पत्थर माना जा रहा है। इस तकनीकी उपलब्धि से रोवर अब दूरस्थ मिशनों में अधिक स्वायत्त और तेज़ी से डेटा एकत्र कर सकता है।
इस मिशन में भारतीय वैज्ञानिकों का भी अहम योगदान रहा है। विशेष रूप से रोवर के एआई और नेविगेशन सिस्टम में तकनीकी सहायता देने वाले भारतीय इंजीनियरों ने इसे संभव बनाया। उनकी मेहनत और नवाचार के चलते परसेवरेंस रोवर ने मंगल की सतह पर जटिल मार्गों को आसानी से तय कर लिया है। इससे भविष्य में अंतरिक्ष खोज और मानव रहित मिशनों की संभावनाएं और भी बढ़ गई हैं।
नासा के अनुसार, एआई आधारित इस नई प्रणाली से रोवर की गति और कामकाज में वृद्धि होगी और मिशन की दक्षता भी बेहतर होगी। वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे न सिर्फ मंगल ग्रह के रहस्यों की खोज में तेजी आएगी, बल्कि भविष्य के अंतरग्रहीय मिशनों के लिए भी नए मानक स्थापित होंगे। इस उपलब्धि के साथ भारतीय प्रतिभा को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली है।


