मोजो मशरूम फैक्ट्री में बाल-मजदूरी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 104 बच्चों को अमानवीय परिस्थितियों से रेस्क्यू किया गया। सामाजिक संगठनों और श्रम विभाग की संयुक्त कार्रवाई में उजागर हुए इस मामले ने सभी को झकझोर दिया है।रेस्क्यू किए गए बच्चों ने बताया कि फैक्ट्री में रात-दिन काम कराया जाता था, और काम में जरा-सी देर या गलती होने पर उनकी मारपीट की जाती थी। कई बच्चों ने यह भी खुलासा किया कि उन्हें सैलरी समय पर नहीं मिलती थी, कई बार तो महीनों तक पैसे नहीं दिए जाते थे।
बच्चों के अनुसार, फैक्ट्री में काम का माहौल बेहद खराब था—12–14 घंटे लगातार कामखाने और सोने की खराब व्यवस्थादेखरेख के नाम पर धमकियां और हिंसा
read also: UNICEF Report 2025: भारत तेजी से घटा रहा गरीबी, लक्ष्य हासिल करने की राह पर – यूनिसेफ
सोशल वर्करों ने बताया कि बच्चों को बेहद दयनीय हालात में पाया गया। कई बच्चे मानसिक तनाव में थे और कुछ शारीरिक चोटों के निशान भी झेल रहे थे।सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि रेस्क्यू के बाद भी अब तक इस मामले में FIR दर्ज नहीं हुई है। स्थानीय अधिकारियों पर सवाल उठ रहे हैं कि इतनी गंभीर बाल-मजदूरी और शोषण के बावजूद कानूनी कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है।बाल अधिकार संगठनों ने तत्काल FIR, फैक्ट्री संचालकों की गिरफ्तारी और बच्चों के पुनर्वास की मांग की है। इस घटना ने एक बार फिर उद्योगों में अवैध बाल-मजदूरी की बड़ी समस्या को उजागर कर दिया है।जांच जारी है और उम्मीद की जा रही है कि संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी, ताकि ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।


