America द्वारा भारतीय सामान पर 50% टैरिफ लगाने से भारत के निर्यातकों पर दबाव बढ़ गया है। लेकिन सरकार ने एक्सपोर्टर्स को राहत देने के लिए खास प्लान तैयार किया है। यह प्लान तीन मोर्चों पर काम करेगा—वित्तीय सहायता, नए बाजारों की तलाश और घरेलू मांग को बढ़ावा।

सरकार का ‘त्रिशूल’ प्लान
वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार प्रभावित एक्सपोर्टर्स को वित्तीय सहायता देगी। इसके अलावा उन्हें नए बाजारों जैसे चीन, लैटिन अमेरिका और मिडिल ईस्ट में बिजनेस डाइवर्सिफाई करने में मदद की जाएगी।
साथ ही, घरेलू स्तर पर जीएसटी में सुधार, इनकम टैक्स में राहत और ग्रामीण इलाकों में मांग बढ़ाने जैसे कदम उठाए जाएंगे ताकि अमेरिकी टैरिफ से होने वाले झटके को कम किया जा सके।
निर्यात और GDP पर असर
- वित्त वर्ष 2025 में भारत ने अमेरिका को 86.5 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया और 45.7 अरब डॉलर का आयात किया।
- अमेरिका भारत के कुल निर्यात का लगभग 2% जीडीपी में योगदान करता है।
- अगर टैरिफ लंबे समय तक जारी रहा, तो भारत की जीडीपी ग्रोथ पर हर साल 0.8% से 1% तक की गिरावट आ सकती है।
CareEdge Ratings की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा के मुताबिक, “ज्यादा टैरिफ से भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा घट सकती है। इससे उनकी वैश्विक बाजार हिस्सेदारी पर बुरा असर पड़ेगा।”
रुपये और निवेश पर असर
एचडीएफसी बैंक की प्रमुख अर्थशास्त्री साक्षी गुप्ता ने कहा कि 50% टैरिफ लगने से विदेशी निवेश पर असर पड़ सकता है और निर्यात घट सकता है।
- रुपया आने वाले हफ्तों में 88-89 तक कमजोर हो सकता है।
- चालू खाता घाटा (CAD) भी बढ़ सकता है।
- उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर RBI रुपये को स्थिर रखने के लिए हस्तक्षेप कर सकता है।
क्या करेगी RBI?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर टैरिफ का दबाव लंबे समय तक बना रहा और विकास दर 6% से नीचे चली गई, तो आरबीआई ब्याज दरों में 50 बेसिस प्वाइंट तक की कटौती कर सकता है। इससे घरेलू मांग को बढ़ावा मिल सकता है।
कितना बड़ा नुकसान?
CareEdge के अनुमान के मुताबिक, नए टैरिफ से भारत से अमेरिका को निर्यात पर प्रभावी टैक्स 2.7% से बढ़कर 35.6% हो गया है। इसके मुकाबले भारत, अमेरिका से आने वाले सामान पर केवल 9.4% टैरिफ लगाता है।
इससे भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है। हालांकि, अर्थशास्त्रियों का यह भी कहना है कि भारत की घरेलू मांग और दूसरे बाजारों पर ध्यान देकर इस झटके को कुछ हद तक संतुलित किया जा सकता है।
निष्कर्ष
ट्रंप का 50% टैरिफ भारत के लिए चुनौती है, लेकिन मोदी सरकार का ‘त्रिशूल’ प्लान—वित्तीय राहत, नए बाजार और घरेलू मांग को बढ़ावा—इस नुकसान को काफी हद तक कम कर सकता है।
भारत के सामने असली चुनौती यह होगी कि वह अमेरिकी बाजार पर निर्भरता घटाकर अपनी निर्यात रणनीति को और मजबूत करे।
Reuters Report on US Tariffs and India’s Export Strategy

