2013 में, Sensex ने करीब 21,000 अंक का स्तर छुआ था। 27 नवंबर 2025 को, Sensex ने पहली बार 86,026.18 अंक पर बंद होकर सर्वकालिक उच्चता दर्ज की। यानी, सिर्फ 12 साल में Sensex में लगभग चार गुना (≈400%) की वृद्धि हुई — यह तेजी भारतीय शेयर बाजार की मजबूती व निवेशकों की लम्बी अवधि की वफादारी को दिखाती है।
यह कितना बड़ा था अंतर — 2013 vs 2025
| वर्ष | Sensex स्तर (लगभग) | टिप्पणी |
|---|---|---|
| 2013 | लगभग 21,000 | 21 हज़ार का आंकड़ा पार हुआ था। |
| 2025 | 86,026.18 (रिकॉर्ड) | बाजार की सर्वकालिक ऊँचाई — निवेशकों को भारी रिटर्न। |
धीरे-धीरे मजबूत होती आर्थिक नींव, निवेशकों का विश्वास और कॉर्पोरेट आय में सुधार। भारत में आर्थिक सुधार, बैंकिंग सेक्टर सुधार, और घरेलू व विदेशी निवेश का बढ़ना। समय-समय पर आ रही गिरावट (जैसे 2020 का कोरोना संकट) के बाद भी बाजार की मजबूती और तेजी: पैनिक के बाद तेजी। लंबे समय तक निवेश “समय में रहना” वाला रवैया — शेयर बाजार में दीर्घकालीन निवेश ने रिटर्न को बढ़ाया।
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हालाँकि Sensex ने 86,000 का स्तर पार कर इतिहास रचा है, लेकिन बाजार ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि भारत की आर्थिक वृद्धि, निवेश प्रवाह, कॉर्पोरेट परिणाम और नीतिगत स्थिरता बनी रहे, तो बाजार आगे भी भरोसेमंद रिटर्न दे सकता है। लेकिन चूंकि रिटर्न में उतार-चढ़ाव संभव है, इसलिए निवेशकों को दीर्घकालिक नजरिया बनाए रखना चाहिए, और केवल अल्प-कालीन रुझानों पर निर्भर नहीं होना चाहिए।


