छत्तीसगढ़ में नक्सल मोर्चे पर नए घटनाक्रम ने सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। माओवादी संगठन की ओर से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को एक पत्र भेजा गया है, जिसमें राज्य में चल रहे एंटी नक्सल ऑपरेशन रोकने की मांग की गई है। साथ ही माओवादी प्रवक्ता ने पत्र में यह भी दावा किया है कि इस बार संगठन नक्सली सप्ताह नहीं मनाएगा।
पत्र के मुताबिक माओवादियों ने कहा है कि लगातार चल रही कड़ी कार्रवाई के कारण उनकी गतिविधियों पर असर पड़ा है, और संगठन बातचीत के लिए तैयार है बशर्ते सरकार ऑपरेशन में नरमी बरते। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां इस पत्र को एक रणनीतिक चाल के रूप में देख रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि बढ़ते दबाव और लगातार सफल अभियानों के चलते माओवादी कमजोर पड़ रहे हैं, इसलिए वे समय हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं।
राज्य सरकार की ओर से अभी इस पत्र पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार सरकार सुरक्षा बलों की कार्रवाई में किसी प्रकार की ढील देने के मूड में नहीं है। पिछले कुछ महीनों में बड़े माओवादी कमांडरों के मारे जाने और कई नक्सलियों के आत्मसमर्पण ने संगठन पर गहरा प्रभाव डाला है।
नक्सली सप्ताह नहीं मनाने का दावा विशेषज्ञों के अनुसार संगठन की कमजोर होती स्थिति को दर्शा सकता है। सामान्यत: यह सप्ताह माओवादी शक्ति-प्रदर्शन और रणनीतिक जुटान माना जाता है, लेकिन इस बार ऐसा न करने की घोषणा सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक संकेत है कि अभियान का दबाव अपने असर दिखा रहा है।
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फिलहाल सुरक्षा बलों को अलर्ट पर रखा गया है और राज्य के संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी गई है। प्रशासन ने भी हालात पर करीबी नजर बनाए हुए है।
आने वाले दिनों में इस पत्र को लेकर राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियों का रुख बेहद अहम होगा।


