रायपुर में अवैध रूप से चल रही एक मशरूम निर्माण इकाई से 131 बच्चों को मजदूरी से मुक्त कराया गया है। जिला प्रशासन और पुलिस द्वारा संयुक्त रूप से की गई इस कार्रवाई ने शहर में बाल श्रम के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। जानकारी के अनुसार, अधिकतर बच्चे पड़ोसी जिलों और राज्यों से लाए गए थे और उन्हें बेहद कम मजदूरी पर कठोर श्रम कराया जा रहा था।
छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने पाया कि बच्चों को लंबे समय तक काम पर लगाया जाता था, जबकि रहने और खाने की सुविधा भी बेहद खराब थी। कई बच्चे 10 से 14 वर्ष की आयु के थे, जो मशरूम पैकेजिंग और सफाई जैसे कार्यों में लगे हुए थे। बचाए गए बच्चों को तत्काल चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के संरक्षण में भेज दिया गया है, जहां उनकी काउंसलिंग और चिकित्सा जांच की जा रही है।
प्रशासन ने इस अवैध इकाई का संचालन करने वाले मालिक और मैनेजर पर बाल श्रम निषेध कानून के तहत कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि बच्चों को यहां कैसे लाया गया और इसमें कौन-कौन शामिल था, इसकी विस्तृत जांच की जा रही है।
इस घटना के उजागर होने के बाद शहर में हड़कंप मचा हुआ है, जबकि बाल अधिकार संगठनों ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि बाल श्रम के खिलाफ सख्त निगरानी और नियमित अभियान बेहद जरूरी हैं। प्रशासन ने भी स्पष्ट किया है कि आगे भी ऐसे प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि बच्चों को शोषण से मुक्त कराया जा सके।


