बस्तर : छत्तीसगढ़ के बस्तर में जवानों को बड़ी कामयाबी मिली है। पहली बार एक साथ 71 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें 64 लाख के 30 इनामी नक्सली भी शामिल है। सरेंडर माओवादी अपने अपने क्षेत्र में नक्सली बंद सप्ताह के दौरान रोड खोदना, पेड़ काटना, पोस्टर व पाम्पलेट लगाने जैसे घटनाओं में संलिप्त थे।
दरअसल, जिला दन्तेवाड़ा में चलाये जा रहे नक्सल उन्मूलन लोन वर्राटू (घर वापस आईये) अभियान तथा ‘‘पूना मारगेम’’ (पुनर्वास से पुनर्जीवन) के तहत जिला पुलिस बल और सीआरपीएफ के द्वारा भटके हुए माओवादियों को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने के लिए लगातार संपर्क व नक्सल पुनर्वास नीति का व्यापक प्रचार-प्रसार गॉव-गॉव तक किया जा रहा है। इसके प्रभाव में लगातार शीर्ष माओवादियों सहित भटके हुए माओवादियों द्वारा आत्मसमर्पण कर रहे है।
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नक्सलियों के अमानवीय, आधारहीन विचारधारा एवं उनके शोषण, अत्याचार तथा स्थानीय आदिवासियों पर होने वाले हिंसा, माओवादी संगठनों के भीतर आंतरिक मदभेद और जंगलो में रहने की कठिनाईयों से तंग आकर नक्सलवाद की ओर भटके युवा अब समाज के मुख्यधारा में जुड़ रहे हैं।
इसी तरह 30 ईनामी माओवादी सहित 71 माओवादियों ने आत्मसमर्पण की इच्छा जाहिर करते हुये लोन वर्राटू (घर वापस आईये) अभियान के तहत आज पुलिस अधीक्षक कार्यालय दन्तेवाड़ा में आत्मसमर्पण किये।
माओवादियों को आत्मसमर्पण कराने में डीआरजी/बस्तर फाईटर्स, विशेष आसूचना शाखा दन्तेवाड़ा/जगदलपुर, 111वीं वाहिनी सीआरपीएफ, 195वीं वाहिनी सीआरपीएफ, 230वीं वाहिनी सीआरपीएफ एवं 231वीं वाहिनी सीआरपीएफ का विशेष योगदान रहा।
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आत्मसमर्पित माओवादियों को पुनर्वास नीति के तहत् 50 हजार रूपये की सहायता राशि के साथ छत्तीसगढ़ शासन द्वारा मिलने वाली अन्य सुविधायें जैसे स्किल डेवलपमेंट हेतू प्रशिक्षण, कृषि भूमि इत्यादि मुहैया कराई जाएगी।


