देश में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ चल रहे अभियान में बड़ी सफलता का दावा किया गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले दस वर्षों में 10,000 से ज्यादा माओवादी और नक्सली कार्यकर्ताओं ने आत्मसमर्पण किया है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि लगातार ऑपरेशन, विकास योजनाओं और पुनर्वास नीतियों की वजह से नक्सल प्रभावित इलाकों में हिंसा में उल्लेखनीय गिरावट आई है।
सरकार का फोकस अब तथाकथित “अर्बन नक्सल” नेटवर्क पर भी बढ़ गया है। जांच एजेंसियां शहरों में सक्रिय उन समूहों और संगठनों पर नजर रख रही हैं, जिन पर नक्सल गतिविधियों को समर्थन देने या संसाधन मुहैया कराने का आरोप है। अधिकारियों के मुताबिक इस रणनीति का उद्देश्य नक्सलवाद की जड़ों को पूरी तरह खत्म करना है।
read also: ‘नरक में स्वागत’: अमेरिकी सैनिकों की तैनाती पर ईरानी मीडिया की चेतावनी, बढ़ा पश्चिम एशिया तनाव
विशेषज्ञों का मानना है कि आत्मसमर्पण और विकास आधारित रणनीति ने कई इलाकों में सकारात्मक असर दिखाया है, लेकिन पूरी तरह खात्मे के लिए लगातार निगरानी और स्थानीय स्तर पर विश्वास बहाली जरूरी होगी। सरकार का दावा है कि आने वाले वर्षों में देश को नक्सल हिंसा से मुक्त बनाने की दिशा में और तेजी से काम किया जाएगा।


