तमिलनाडु के कलपक्कम से भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को बड़ी ताकत मिली है। यहां प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) परियोजना अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, जिसे भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) विकसित कर रहा है। यह तकनीक अब तक व्यावसायिक स्तर पर केवल रूस ही सफलतापूर्वक उपयोग कर पाया है। इस उपलब्धि के साथ भारत दुनिया के चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल होने जा रहा है जो फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तकनीक को अपनाते हैं।
फास्ट ब्रीडर रिएक्टर खास इसलिए है क्योंकि यह परमाणु ईंधन का बेहतर उपयोग करता है और जितना ईंधन खर्च करता है उससे ज्यादा नया ईंधन पैदा कर सकता है। इससे भारत के विशाल थोरियम भंडार के उपयोग का रास्ता भी खुल जाएगा। भारत लंबे समय से तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम पर काम कर रहा है, जिसमें अंतिम लक्ष्य थोरियम आधारित ऊर्जा उत्पादन है। PFBR की सफलता इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
read also: Data Hungry Apps: सावधान! ये खतरनाक ऐप्स चुरा रहे हैं आपका डेटा, अभी करें डिलीट
विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और आयातित ईंधन पर निर्भरता घटेगी। साथ ही, स्वच्छ और स्थिर बिजली उत्पादन बढ़ने से देश के कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। कलपक्कम की यह उपलब्धि भारत को परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हो सकती है।


