आज साल का सबसे बड़ा पूर्ण चंद्रग्रहण लगने जा रहा है, जिसे खगोल विज्ञान की भाषा में “ब्लड मून” भी कहा जाता है। यह पूर्ण चंद्रग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया पूरी तरह चंद्रमा को ढक लेती है। भारत समेत एशिया, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका के कई हिस्सों में यह खगोलीय घटना अलग-अलग समय पर दिखाई देगी। मौसम साफ रहने पर लोग इसे नंगी आंखों से भी देख सकेंगे।
भारत में यह पूर्ण Lunar Eclipse देर रात से शुरू होकर तड़के तक देखा जा सकेगा, जबकि अमेरिका और यूरोप के कुछ हिस्सों में यह शाम या आधी रात के समय दिखाई देगा। खगोलविदों के अनुसार पूर्ण चरण के दौरान चंद्रमा कुछ समय के लिए पूरी तरह पृथ्वी की गहरी छाया (उम्ब्रा) में रहेगा, जो इस ग्रहण का सबसे रोमांचक हिस्सा होता है।
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ग्रहण के दौरान चंद्रमा सुर्ख लाल इसलिए दिखाई देता है क्योंकि पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य की रोशनी को अपवर्तित (रिफ्रैक्ट) कर लाल रंग की किरणों को चंद्रमा तक पहुंचने देता है, जबकि नीली रोशनी बिखर जाती है। यही कारण है कि पूर्ण चंद्रग्रहण के समय चंद्रमा तांबे या लाल रंग का नजर आता है। वैज्ञानिकों के लिए यह घटना पृथ्वी के वायुमंडलीय अध्ययन का भी महत्वपूर्ण अवसर मानी जाती है।


