इस साल करवा चौथ का पर्व एक दुर्लभ योग में मनाया जा रहा है, जिससे इसका धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व कई गुना बढ़ गया है। सुहागिन महिलाएँ अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए कठोर निर्जला व्रत रखेंगी। आइए जानते हैं इस शुभ दिन का मुहूर्त, चांद निकलने का समय और पूजा विधि से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ।
करवा चौथ 2025 की तिथि और दुर्लभ योग
इस बार करवा चौथ का व्रत 22 अक्टूबर 2025, बुधवार को मनाया जाएगा।
पंडितों के अनुसार, इस वर्ष शिव योग और सिद्ध योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।
व्रत और पूजा का शुभ मुहूर्त
करवा चौथ व्रत आरंभ: सुबह सूर्योदय से
पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 5:36 बजे से 6:54 बजे तक
चांद निकलने का अनुमानित समय: रात 8:11 बजे
इस मुहूर्त में सुहागिनें चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपने व्रत का समापन करेंगी।
चांद निकलने का महत्व
करवा चौथ पर महिलाएँ पूरे दिन बिना जल पिए व्रत रखती हैं।
चांद के दर्शन के बाद ही व्रत खोला जाता है। परंपरा के अनुसार, महिलाएँ छलनी से चांद को देखकर फिर अपने पति का चेहरा देखती हैं और जल ग्रहण करती हैं।
पूजा विधि और सामग्री
पूजा के लिए करवा, दीपक, सिन्दूर, रोली, चावल, मिठाई, सात अनाज, फल और जल का कलश तैयार करें।
देवी गौरी मां की प्रतिमा या तस्वीर की पूजा करें और करवा चौथ की कथा सुनें।
पति की लंबी आयु के लिए प्रार्थना करें और चांद को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलें।
दुर्लभ योग का ज्योतिषीय प्रभाव
इस बार का करवा चौथ सिद्ध योग और रोहिणी नक्षत्र में पड़ रहा है, जिसे वैवाहिक जीवन की मजबूती और सौभाग्य बढ़ाने वाला योग माना गया है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस संयोग में व्रत रखने वाली महिलाएँ विशेष पुण्य प्राप्त करेंगी।


