मध्य पूर्व में बढ़ते Israel–Iran तनाव की तपिश अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ भारत तक महसूस की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात और बिगड़ते हैं तो वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर गंभीर असर पड़ सकता है। खासकर समुद्री मार्गों और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े रूट प्रभावित होने पर एशियाई बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है। भारत, जो कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, उसके लिए यह स्थिति आर्थिक दबाव बढ़ाने वाली साबित हो सकती है।
ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की आशंका जताई जा रही है। इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल के दाम और महंगाई पर पड़ सकता है। साथ ही, वैश्विक अस्थिरता के दौर में निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिससे सोना और चांदी की कीमतों में तेजी देखी जा सकती है। भारतीय बाजार में भी इन कीमती धातुओं की मांग बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
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विश्लेषकों का कहना है कि अगर संघर्ष लंबा खिंचता है तो शिपिंग लागत, बीमा प्रीमियम और आयात बिल में वृद्धि हो सकती है। हालांकि भारत सरकार और संबंधित एजेंसियां हालात पर नजर बनाए हुए हैं और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की संभावनाएं भी तलाश रही हैं। फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल है और निवेशकों को सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह दी जा रही है।


