Why Hands Go Numb At Night: क्या कभी ऐसा हुआ है कि रात में नींद खुली और महसूस हुआ कि हाथ पूरी तरह सुन्न पड़ गया है, जैसे उसमें जान ही नहीं है? कई लोगों के साथ ऐसा होता है और यह कोई बहुत रेयर समस्या नहीं है. रिसर्च के अनुसार लगभग एक-तिहाई एडल्ट को हफ्ते में कम से कम एक बार सोते समय हाथ, कलाई या बाजू में सुन्नपन और झनझनाहट महसूस होती है. इस स्थिति को मेडिकल भाषा में नॉक्टर्नल पैरास्थीसिया कहा जाता है. ज्यादातर मामलों में यह गंभीर समस्या नहीं होती, लेकिन अगर यह बार-बार होने लगे या उठने के बाद भी लंबे समय तक बना रहे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है.
हाइवे किनारे मकान या दुकान बनाना हुआ आसान! ‘राजमार्ग प्रवेश’ पोर्टल से अब ऑनलाइन मिलेगी अनुमति
क्यों होती है इस तरह की दिक्कत
हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली संस्था sleepfoundation के अनुसार, सोते समय हाथ सुन्न होने का सबसे आम कारण नसों पर दबाव पड़ना होता है. जब किसी वजह से नस दब जाती है या ब्लड फ्लो थोड़ी देर के लिए कम हो जाता है, तो हाथ में झनझनाहट या पिन्स एंड नीडल्स जैसा एहसास होने लगता है. यह शरीर का एक तरह का संकेत होता है कि किसी हिस्से पर दबाव पड़ रहा है और उसे सही स्थिति में लाने की जरूरत है.
गलत पोजीशन भी जिम्मेदार
कई बार सोने की गलत पोजीशन भी इसकी वजह बन जाती है. अगर आप कलाई को मोड़कर सोते हैं, हाथ को सिर के नीचे रख लेते हैं, बाजू पर सिर टिकाकर सोते हैं या शरीर का वजन हाथ पर आ जाता है, तो नसों पर दबाव पड़ सकता है. कुछ लोगों में तकिए की गलत ऊंचाई या गर्दन और रीढ़ की गलत स्थिति भी इस समस्या को बढ़ा सकती है. ऐसे में हाथ तक जाने वाला ब्लड फ्लो कुछ समय के लिए कम हो जाता है और हाथ सुन्न महसूस होने लगता है.
इनके कारण भी होती है दिक्कत
कभी-कभी हाथों का सुन्न होना नसों से जुड़ी दूसरी समस्याओं का संकेत भी हो सकता है. उदाहरण के लिए पेरिफेरल न्यूरोपैथी में नसें ठीक से काम नहीं कर पातीं, जिससे हाथ-पैरों में सुन्नपन या जलन महसूस हो सकती है. इसके पीछे डायबिटीज, विटामिन की कमी, इंफेक्शन, कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट या अत्यधिक शराब का सेवन भी जिम्मेदार हो सकता है.
पेट्रोल पंप में 40 लाख की हेराफेरी! मैनेजर पर लगा गबन का आरोप, शिकायत के बाद पुलिस ने किया गिरफ्तार
कैसे करें बचाव?
अगर नींद खुलने पर हाथ सुन्न महसूस हो, तो घबराने की जरूरत नहीं होती. आमतौर पर शरीर की पोजीशन बदलने, हाथ-पैरों को हल्का हिलाने-डुलाने या उंगलियों को धीरे-धीरे स्ट्रेच करने से कुछ ही मिनट में यह समस्या ठीक हो जाती है. हल्की मालिश करने या हाथों को गुनगुने पानी के नीचे रखने से भी ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और झनझनाहट कम हो जाती है. हालांकि अगर यह समस्या बार-बार हो रही हो या दर्द और कमजोरी भी महसूस हो, तो डॉक्टर से जांच करवाना बेहतर होता है.


