प्लास्टिक प्रदूषण को लेकर आई एक नई रिपोर्ट ने गंभीर चेतावनी दी है कि यह “अदृश्य महामारी” 2040 तक वैश्विक स्तर पर इंसानों से 8.3 करोड़ स्वस्थ जीवन वर्ष (Healthy Life Years) छीन सकती है। अध्ययन के मुताबिक, माइक्रोप्लास्टिक और सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का बढ़ता इस्तेमाल न सिर्फ पर्यावरण बल्कि मानव स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डाल रहा है। प्लास्टिक के कण हवा, पानी और खाद्य श्रृंखला के जरिए शरीर में पहुंच रहे हैं, जिससे हृदय रोग, कैंसर, हार्मोनल असंतुलन और श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सुविधा के लिए शुरू हुआ प्लास्टिक अब वैश्विक स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुका है। विकासशील देशों में कचरा प्रबंधन की कमी और पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) की सीमित व्यवस्था समस्या को और गंभीर बना रही है। रिपोर्ट में चेताया गया है कि यदि प्लास्टिक उत्पादन और उपभोग की वर्तमान रफ्तार जारी रही तो आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य प्रणालियों पर भारी बोझ पड़ेगा।
read also: Rajpal Yadav in Jail: राजपाल यादव की तिहाड़ जेल से रिहाई कब? चेक बाउंस केस में आया नया अपडेट
रिपोर्ट में सरकारों से सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर सख्त प्रतिबंध, बेहतर कचरा प्रबंधन और टिकाऊ विकल्पों को बढ़ावा देने की अपील की गई है। साथ ही आम लोगों से भी प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने का आग्रह किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते ठोस कदम उठाए गए तो इस ‘अदृश्य महामारी’ के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।


