सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Instagram पर किशोरों की सुरक्षा को लेकर नई बहस छिड़ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंस्टाग्राम की पेरेंट कंपनी Meta Platforms ऐसी नीति पर काम कर रही है, जिसके तहत अगर कोई किशोर आत्महत्या या सेल्फ-हार्म से जुड़े शब्द सर्च करता है, तो माता-पिता को अलर्ट भेजा जा सकता है। इस संभावित फीचर का मकसद बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाना और समय रहते हस्तक्षेप करना बताया जा रहा है।
हालांकि इस कदम को लेकर गोपनीयता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल उठ रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे अलर्ट से बच्चों की निजता प्रभावित हो सकती है और वे संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर जानकारी खोजने से हिचक सकते हैं। वहीं समर्थकों का तर्क है कि बढ़ते मानसिक स्वास्थ्य संकट के बीच यह कदम कई परिवारों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकता है।
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तकनीकी और कानूनी जानकारों का मानना है कि किसी भी नई नीति में संतुलन बेहद जरूरी है—एक तरफ किशोरों की सुरक्षा, तो दूसरी तरफ उनकी प्राइवेसी का सम्मान। मेटा की ओर से अभी अंतिम दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं, लेकिन इस प्रस्तावित नीति ने डिजिटल सुरक्षा बनाम निजता की बहस को फिर से तेज कर दिया है।


