नई दिली — Reserve Bank of India (RBI) की ताज़ा जानकारी के अनुसार, देश का विदेशी मुद्रा भंडार पिछले हफ्ते में लगभग 5.543 अरब डॉलर बढ़कर 692.576 अरब डॉलर हो गया है।
यह आंकड़ा सप्ताह समाप्ति 14 नवंबर, 2025 तक के लिए है। भंडार में वृद्धि का मुख्य कारण सोने के भंडार (Gold Reserves) का मूल्यवृद्धि होना बताया गया है, जिसका अनुमानित बढ़ावा लगभग 5.327 अरब डॉलर रहा। विदेशी मुद्रा भंडार के अन्य घटक जैसे विदेश मुद्रा संपत्तियाँ (Foreign Currency Assets – FCA), विशेष आहरण अधिकार (SDRs) तथा International Monetary Fund (IMF) में आरक्षित स्थिति (Reserve Position) भी हल्की बढ़त दिखा रहे हैं। 1FCA में ~1.52 अरब डॉलर की वृद्धि हुई, जो अब ~562.29 अरब डॉलर पर है। SDRs और IMF में आरक्षित स्थिति क्रमशः लगभग +56 मिलियन डॉलर और +8 मिलियन डॉलर से बढ़ी।
यह बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है क्योंकि इससे निम्न बिंदु बलवती होते हैं:इस तरह से देश के पास अधिक सुरक्षित भंडार होता है जो बाहरी आर्थिक झटकों (external shocks) को सहने में मदद कर सकता है।सोने के मूल्य में वृद्धि के कारण भंडार में उछाल आया है, जो इस तरह की परिसंपत्तियों की भूमिका पर प्रकाश डालता है।हालांकि FCA की वृद्धि अपेक्षाकृत कम रही — इसका मतलब है कि विदेशी मुद्रा की अन्य मुद्राओं और संपत्तियों पर निर्भरता अभी भी बनी हुई है।
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विश्लेषकों का कहना है कि भंडार की बढ़ती प्रवृत्ति जारी रह सकती है, लेकिन इसके लिए सोने और विदेशी मुद्राओं की कीमतों, वैश्विक आर्थिक परिदृश्यों तथा डॉलर की चाल पर निगरानी जरूरी रहेगी। यह देखना होगा कि यह वृद्धि कितनी सतत होती है और क्या यह वास्तविक अर्थव्यवस्था में निवेश एवं विकास को मजबूत करती है।


