मार्च महीने में भारत के विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर चार साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है। ताजा PMI आंकड़ों के अनुसार उत्पादन और नए ऑर्डर की रफ्तार धीमी पड़ी है, जिससे सेक्टर की कुल वृद्धि पर दबाव देखने को मिला। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक मांग में उतार-चढ़ाव और लागत बढ़ने जैसे कारण इस गिरावट के पीछे प्रमुख रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि धीमी उत्पादन वृद्धि के बावजूद रोजगार और निर्यात में मजबूत उछाल दर्ज किया गया है। कंपनियों ने भविष्य की मांग को देखते हुए भर्ती बढ़ाई है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों से ऑर्डर मिलने से निर्यात में तेजी आई है। यह संकेत देता है कि वैश्विक स्तर पर भारतीय उत्पादों की मांग बनी हुई है।
अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, यदि आने वाले महीनों में मांग स्थिर रहती है तो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर फिर से रफ्तार पकड़ सकता है। फिलहाल कमजोर उत्पादन और मजबूत रोजगार के इस मिश्रित ट्रेंड को अर्थव्यवस्था के लिए संतुलित संकेत माना जा रहा है।


