Indian Archery in 2025 में भारतीय तीरंदाजी के लिए मिले-जुले नतीजे देखने को मिले। कंपाउंड वर्ग में शीतल ने अपने शानदार और लगातार प्रदर्शन से देश का नाम रोशन किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर यह साबित किया कि भारतीय कंपाउंड तीरंदाजी सही दिशा में आगे बढ़ रही है और विश्व स्तर पर मजबूत चुनौती पेश कर सकती है।
वहीं दूसरी ओर, रिकर्व वर्ग के तीरंदाजों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। कई प्रमुख टूर्नामेंटों में भारतीय रिकर्व खिलाड़ियों को शुरुआती दौर में ही बाहर होना पड़ा, जिससे ओलंपिक श्रेणी में भारत की तैयारियों पर सवाल खड़े हो गए। तकनीकी गलतियों, मानसिक दबाव और निरंतरता की कमी को इसके प्रमुख कारण माना जा रहा है।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रिकर्व तीरंदाजी में कोचिंग, खेल विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर पर विशेष ध्यान दिया जाए, तो हालात सुधर सकते हैं। शीतल के प्रदर्शन ने हालांकि यह उम्मीद जरूर जगाई है कि सही रणनीति और समर्थन मिलने पर भारतीय तीरंदाजी 2025 और आगे भी वैश्विक मंच पर मजबूत वापसी कर सकती है।


