भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को ‘मेड इन इंडिया’ के लिए बड़ा गेमचेंजर माना जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस समझौते के लागू होने से भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी, जिससे वे चीनी सामान को कड़ी टक्कर दे सकेंगे। खासतौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, फार्मा और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे सेक्टरों में भारतीय उद्योग को सीधी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलने की उम्मीद है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, व्यापार समझौते के तहत टैरिफ में रियायत, सप्लाई चेन सहयोग और निवेश को बढ़ावा देने जैसे प्रावधान शामिल हो सकते हैं। इससे भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में एक भरोसेमंद विकल्प के तौर पर स्थापित करने में मदद मिलेगी। मौजूदा भू-राजनीतिक हालात में अमेरिका भी चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति पर काम कर रहा है, जिसमें भारत अहम भूमिका निभा सकता है।
उद्योग जगत का मानना है कि यह डील ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को नई रफ्तार देगी। इससे न सिर्फ निर्यात बढ़ेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। अगर समझौता समय पर लागू होता है, तो यह भारत को वैश्विक व्यापार मानचित्र पर और मजबूत स्थिति में ला सकता है, जबकि चीन की बाजार हिस्सेदारी पर दबाव बढ़ सकता है।


