भारत-रूस शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा आयोजित राजकीय भोज में शनिवार रात भारतीय परंपराओं और क्षेत्रीय स्वादों का अनोखा संगम देखने को मिला। राष्ट्रपति भवन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का स्वागत खास व्यंजनों की उस श्रृंखला से किया गया, जिसने भारत की विविध पाक कलाओं को एक साथ पिरोया।
भोज के मेन्यू में देश की विभिन्न संस्कृतियों से जुड़े व्यंजनों को शामिल किया गया था। कश्मीर की दुर्लभ गुच्ची मशरूम से बनी डिश ने अतिथियों का विशेष ध्यान खींचा। गुच्ची को इसके अनोखे स्वाद, औषधीय गुणों और ऊँचे मूल्य के कारण ‘हिमालयन ट्रफल’ भी कहा जाता है।
इसके साथ ही बंगाल का प्रसिद्ध गुर सेंधेश, राजस्थान के पारंपरिक दाल-बाटी तत्व, दक्षिण भारत की फिल्टर कॉफी, महाराष्ट्र का मसाला भात, और बिहार की लिट्टी प्रेरित व्यंजन शृंखला भी भोज में परोसी गई। इन सभी पकवानों का उद्देश्य भारतीय खानपान की समृद्ध विविधता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करना था।
पुतिन के लिए परोसे गए इस राजकीय भोज में न सिर्फ स्वाद पर ध्यान दिया गया, बल्कि प्रत्येक व्यंजन की प्रस्तुति में भारत की सांस्कृतिक विरासत के रंग भी झलक रहे थे। भोज में उपयोग की गई थाली परंपरागत भारतीय कला शिल्प से प्रेरित थी, जबकि व्यंजनों में स्थानीय मसालों और देसी घी का खास उपयोग किया गया।
इस राजकीय भोज को कूटनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह भारत-रूस की गहरी मित्रता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के संदेश को और मजबूत करता है। पुतिन ने भोज की सराहना करते हुए भारतीय आतिथ्य और विविधता की प्रशंसा की।


