India-France Defence Deal 2025: भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग ने एक नया मुकाम हासिल कर लिया है। राफेल लड़ाकू विमानों की सफलता के बाद अब दोनों देशों ने 100 उन्नत कॉम्बैट ड्रोन की खरीद को लेकर बड़ा रक्षा समझौता किया है। यह डील न केवल भारतीय नौसेना और वायुसेना की क्षमताओं को नई ऊंचाई देगी, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति को भी मजबूत करेगी।
रक्षा क्षेत्र में भारत-फ्रांस की साझेदारी
भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुआ है। राफेल फाइटर जेट्स की डिलीवरी के बाद अब यह नया कॉम्बैट ड्रोन डील इस साझेदारी की अगली कड़ी है। फ्रांस की प्रसिद्ध रक्षा कंपनी Dassault Aviation और भारत की HAL (Hindustan Aeronautics Limited) मिलकर इन ड्रोन को भारत में तैयार करने की दिशा में काम करेंगे। इन ड्रोन में अत्याधुनिक AI-बेस्ड टारगेटिंग सिस्टम, लॉन्ग रेंज ऑपरेशन क्षमता और स्वचालित नेविगेशन टेक्नोलॉजी होगी।
ड्रोन डील की प्रमुख बातें
- कुल 100 कॉम्बैट ड्रोन का सौदा तय
- समझौते की कुल कीमत लगभग 4.2 बिलियन डॉलर
- ड्रोन की पहली खेप अगले साल तक भारत को मिल सकती है
- इनका इस्तेमाल वायुसेना और नौसेना दोनों करेगी
- भारत में “मेक इन इंडिया” मिशन के तहत स्थानीय निर्माण भी शामिल
समुद्री सुरक्षा को मिलेगा बड़ा फायदा
दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर में बढ़ते तनाव के बीच यह डील भारत के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इन ड्रोन की मदद से भारत समुद्री निगरानी, सीमा सुरक्षा और आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले जैसी मिशन में और प्रभावी होगा।
भारत की रक्षा नीति को नई दिशा
भारत ने हाल के वर्षों में कई देशों के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाया है, जिसमें अमेरिका, इज़राइल और फ्रांस प्रमुख हैं। यह नया समझौता भारत के आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र की दिशा में एक और बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारत का लक्ष्य केवल खरीदारी नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है।
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