पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत के निर्यात पर भी पड़ने लगा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि हालात लंबे समय तक तनावपूर्ण बने रहे तो देश का वस्तु निर्यात करीब 8% तक घट सकता है। इस क्षेत्र में जारी संघर्ष और समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिम से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है, जिसका सीधा असर भारतीय व्यापार पर पड़ सकता है।
खासतौर पर Strait of Hormuz जैसे अहम समुद्री मार्गों में अनिश्चितता बढ़ने से शिपिंग लागत और बीमा प्रीमियम में तेजी देखी जा रही है। इसका असर पेट्रोलियम उत्पादों, इंजीनियरिंग सामान और केमिकल्स जैसे प्रमुख निर्यात क्षेत्रों पर पड़ सकता है। साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से उत्पादन लागत बढ़ने का जोखिम भी बना हुआ है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो निर्यातकों को नए बाजार तलाशने और लॉजिस्टिक्स रणनीति में बदलाव करने की जरूरत पड़ेगी। सरकार और उद्योग जगत स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि संभावित आर्थिक झटके को कम किया जा सके और निर्यात क्षेत्र को सहारा मिल सके।


