ईरान-इजरायल तनाव ने वैश्विक एविएशन सेक्टर को गहरी चोट पहुंचाई है। पश्चिम एशिया के एयरस्पेस में बढ़ते खतरे के कारण कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस को अपने रूट बदलने पड़े हैं, जिससे उड़ानों की दूरी और समय दोनों बढ़ गए हैं। इसके चलते ईंधन खर्च में भारी इजाफा हुआ है और कई एयरलाइंस ने कुछ रूट्स पर उड़ानों की संख्या घटा दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे रूट और एयरस्पेस बंद होने से ऑपरेटिंग कॉस्ट में तेज बढ़ोतरी हुई है। एयरलाइंस को अतिरिक्त ईंधन, क्रू समय और एयरपोर्ट शुल्क का बोझ झेलना पड़ रहा है। इसका सीधा असर टिकट कीमतों पर भी पड़ सकता है, जिससे यात्रियों को महंगी उड़ानों का सामना करना पड़ सकता है। कई कंपनियां जोखिम वाले क्षेत्रों से गुजरने से बच रही हैं, जिससे वैश्विक हवाई नेटवर्क पर दबाव बढ़ गया है।
एविएशन इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, इस संकट से अब तक अरबों डॉलर का नुकसान हो चुका है और अगर स्थिति लंबी चली तो यह नुकसान और बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति सामान्य होने तक एयरलाइंस को लागत बढ़ने और यात्रियों की संख्या में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।


