नई दिल्ली : भारत में कुछ दवाओं को बिना डाक्टर की पर्ची या प्रेसक्रिप्शन के खरीदा बेचा नहीं जा सकता है, लेकिन अवैध तरीके से इन दवाओं की आनलाइन खरीद बिक्री बड़ी समस्या है। दवाओं की ऑनलाइन तस्करी के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने रविवार को समन्वित आपरेशन- ‘वाइप’ – शुरू किया और आनलाइन तस्करी के 122 मामलों की पहचान की। एनसीबी ने एक बयान में कहा कि उसने वेब बेस्ड इलिसिट एक्टिविटीज ¨प्रवेशन एंड इंफोर्समेंट (वाइप) के तहत कुछ आनलाइन प्लेटफार्मों को नोटिस जारी किए हैं, जिसमें उन्हें ‘तत्काल’ कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। एनडीपीएस (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रापिक सब्सटेंसेस एक्ट) के तहत विनियमित उत्पादों की सूची साझा की गई है ताकि ऐसी सूचियों की पहचान और उन्हें हटाने में मदद मिल सके।
एनसीबी ने अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री रोकी
इस संबंध में इंडिया मार्ट, ट्रेडइंडिया और डायल4ट्रेड जैसे आनलाइन प्लेटफार्म ने कुछ उपाय किए हैं, जिनमें संदिग्ध विक्रेताओं को निलंबित करना शामिल है।एनसीबी ने 62 प्रतिबंधित पदार्थों से जुड़े 122 मामलों की पहचान की है, जिनमें क्लोनाजेपम, डायजेपम और फेंटानिल जैसी ‘आमतौर पर दुरुपयोग की जाने वाली’ दवाएं शामिल हैं। इनमें से 58 पदार्थ एनडीपीएस अधिनियम के दायरे में आते हैं, जबकि चार को ‘नियंत्रित’ पदार्थों के रूप में वर्गीकृत किया गया है। एनसीबी की तकनीकी टीमें खतरों की पहचान करने और समय पर हस्तक्षेप सुनिश्चित करने के लिए उन्नत उपकरणों और अंतरराष्ट्रीय खुफिया जानकारी का उपयोग करके निगरानी कर रही है।
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प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री पर कार्रवाई
एनसीबी ‘आपरेशन वाइप’ चलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय नारकोटिक्स कंट्रोल बोर्ड (आइएनसीबी) के खुफिया प्लेटफार्म एसएनओओपी (स्कैनिंग नोवेल ओपिओइड्स ऑन ऑनलाइन प्लेटफार्म्स) के नाम से जाना जाता है की मदद ले रही है। यह पहल ‘आपरेशन मेड-मैक्स’ की सफलता पर आधारित है, जिसे एनसीबी ने अमेरिकी डीईए, आस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस (एएफपी) और कुछ अन्य विदेशी एजेंसियों के साथ मिलकर जुलाई 2025 में अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थों की तस्करी गिरोह को खत्म करने के लिए चलाया था।


