रायपुर, छत्तीसगढ़ में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) के हॉस्टलों की जर्जर हालत ने विद्यार्थियों की सुरक्षा और आवास व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विश्वविद्यालय परिसर में 30 से 60 साल पुराने कई हॉस्टलों से प्लास्टर और छज्जे गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। करीब 2,000 विद्यार्थियों के मुकाबले परिसर के 14 हॉस्टलों में केवल 1,400 बेड उपलब्ध हैं, जिसके कारण लगभग 600 छात्रों को बाहर रहना पड़ रहा है। दो महीने पहले शिवम, सत्यम और मंदाकिनी हॉस्टलों में प्लास्टर व छज्जे गिरने की घटनाओं में एक छात्र घायल भी हुआ था।naidunia
60 साल पुराने भवनों की हालत खराब
IGKV परिसर में बने कई हॉस्टल 30 से 60 साल पुराने बताए गए हैं। वर्ष 1960 में बना सत्यम हॉस्टल समेत अन्य पुराने भवनों की हालत को लेकर छात्र लंबे समय से चिंता जता रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, शिवम, सत्यम और मंदाकिनी हॉस्टलों में दो महीने पहले प्लास्टर और छज्जे गिरने की घटनाएं हुई थीं। इन घटनाओं में एक छात्र घायल हुआ था। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन ने भवनों की जांच और मरम्मत कराने की बात कही थी, लेकिन छात्रों के अनुसार जमीनी स्तर पर सुधार का काम पूरा नहीं हुआ।naidunia
फंड और स्टाफ के बाद भी मरम्मत अधूरी
विश्वविद्यालय में भवनों के रखरखाव और छोटे-मोटे मरम्मत कार्यों के लिए अलग व्यवस्था मौजूद है। रिपोर्ट के अनुसार, इस काम के लिए दो इंजीनियर, दो लिपिक और एक केयरटेकर तैनात हैं।
जरूरत के हिसाब से हॉस्टल मरम्मत कार्यों पर ₹50 लाख तक खर्च किया जा सकता है, जिसकी वित्तीय मंजूरी स्टूडेंट वेलफेयर सोसाइटी देती है। फंड और कर्मचारियों की व्यवस्था होने के बावजूद पुराने हॉस्टलों की समय पर मरम्मत नहीं हो पाने पर सवाल उठ रहे हैं।naidunia
पिछले महीने परीक्षाओं के बाद विद्यार्थियों की छुट्टियां थीं। छात्रों का कहना है कि यह समय मरम्मत और सुरक्षा से जुड़े कार्य पूरे करने के लिए उपयुक्त था, लेकिन कई जगहों पर अपेक्षित काम नहीं हुआ।
2,000 छात्रों के लिए 1,400 बेड
IGKV परिसर में कुल 14 हॉस्टल संचालित हैं। इनमें छह छात्रावास बालिकाओं के लिए हैं, जिनकी कुल क्षमता 650 सीटों की है। वहीं, आठ बालक हॉस्टलों में 750 विद्यार्थियों के रहने की सुविधा है।
इस तरह 14 हॉस्टलों में कुल 1,400 बेड उपलब्ध हैं, जबकि विश्वविद्यालय में लगभग 2,000 छात्रों को आवास की जरूरत है। करीब 600 छात्र, यानी लगभग 30 प्रतिशत, परिसर के बाहर किराये के मकान या निजी हॉस्टल में रहने के लिए मजबूर हैं।naidunia
छात्रों ने उठाई सुरक्षा की मांग
छात्रों की प्रमुख मांग है कि पुराने हॉस्टलों का तत्काल तकनीकी सर्वे कराया जाए और खतरनाक हिस्सों की मरम्मत जल्द पूरी की जाए। छात्रों का कहना है कि प्लास्टर और छज्जे गिरने की घटनाओं के बाद भी जर्जर भवनों में रहना जोखिमभरा है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए हॉस्टल भवनों की संरचनात्मक जांच, मरम्मत की समयसीमा और अतिरिक्त आवास की योजना स्पष्ट करना जरूरी है। सुरक्षा मानकों के अनुरूप भवन सुधार और बेड क्षमता बढ़ाने से छात्रों को राहत मिल सकती है।



