Idli Amma: तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले की एक 89 वर्षीय बुजुर्ग महिला कमलाथल को लोग प्यार से इडली अम्मा कहते हैं। इडली अम्मा ने अपने जीवन के पिछले तीन दशक समाज की सेवा में समर्पित कर दिए हैं। उनका लक्ष्य कभी पैसा कमाना नहीं रहा, बल्कि भूखे को सस्ता और पौष्टिक भोजन देना रहा है।
जहां आज एक इडली की कीमत 10-20 रुपये हो चुकी है, वहीं कमलाथल आज भी सिर्फ एक रुपये में इडली बेचती हैं और वो भी ताजी, गरमा-गरम और चटनी के साथ। इडली अम्मा कमलाथल की कहानी सिर्फ इडली बेचने की नहीं, बल्कि समाज को अपनापन और आत्मीयता देने की कहानी है। उन्होंने ये साबित किया कि बिना ब्रांड, बिना शोहरत और बिना लालच के भी कोई दिल जीत सकता है।
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सिर्फ 1 रुपये में इडली, 30 वर्षों से
कमलाथल का जीवन पैसा कमाने की होड़ से कोसों दूर है। वाडी वेलमपलायम गांव की इस महिला का मिशन है, गरीब मजदूरों को सस्ती, सेहतमंद और स्वादिष्ट इडली देना। वह हर सुबह 5 बजे उठकर खुद खाना बनाती हैं और 6 बजे से दुकान खोल देती हैं।
बिना ब्रांड, बिना सोशल मीडिया
कमलाथल के पास न कोई सोशल मीडिया है, न प्रचार का जरिया। फिर भी उनकी सादगी और सेवा भावना ने पूरे देश को उनका फैन बना दिया है। बोलुवमपट्टी, पूलुवमपट्टी और मथीपलायम जैसे गांवों से लोग रोज उनकी दुकान पर आते हैं।
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लकड़ी से गैस तक का सफर
कई वर्षों तक उन्होंने लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाया। लेकिन जब आनंद महिंद्रा ने उनकी कहानी देखी तो उन्होंने LPG गैस, किचन सेट और बाद में नया घर तक गिफ्ट किया। भारत पेट्रोलियम ने ग्राइंडर और कनेक्शन देकर उनका काम आसान बनाया।
कोरोना में भी रुकी नहीं सेवा
कोविड जैसे संकट में भी जब कई दुकानें बंद थीं, तब भी इडली अम्मा रोज गरीबों के लिए इडली बनाती रहीं। उनकी दुकान जरूरतमंदों के लिए भोजनालय बन गई थी। कमलाथल बताती हैं कि “मुनाफे के लिए नहीं, मन की संतुष्टि के लिए काम करो।” उनकी कहानी आज की पीढ़ी को यह सिखाती है कि नाम कमाने के लिए बड़ी कंपनी नहीं, बड़ा दिल होना चाहिए।


