भारत की जनगणना के इतिहास में 1921 एक ऐसा साल माना जाता है जब पहली और आखिरी बार देश की आबादी में गिरावट दर्ज की गई। Census of India के आंकड़ों के अनुसार यह कमी मुख्य रूप से 1918-19 की भीषण स्पैनिश फ्लू महामारी के कारण हुई, जिसने पूरे देश में भारी तबाही मचाई। इतिहासकारों के मुताबिक इस महामारी में करीब सवा करोड़ लोगों की जान गई, जिससे जनसंख्या वृद्धि पर गहरा असर पड़ा।
उस समय स्वास्थ्य सेवाएं सीमित थीं और महामारी तेजी से गांवों व शहरों में फैल गई। कई क्षेत्रों में पूरे-पूरे परिवार इस बीमारी की चपेट में आ गए, जिसके कारण मृत्यु दर असामान्य रूप से बढ़ गई। यही वजह थी कि 1921 की जनगणना को भारत के जनसांख्यिकीय इतिहास में ‘महान विभाजन का वर्ष’ भी कहा जाता है।
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India के लिए यह घटना एक बड़ी चेतावनी साबित हुई, जिसके बाद सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत महसूस की गई। 1921 के बाद देश की जनसंख्या लगातार बढ़ती रही और यह साल इतिहास में एकमात्र अपवाद बनकर दर्ज हो गया।


