कहते हैं “किस्मत कभी-कभी चुपके से खुल जाती है”— ऐसा ही कुछ हुआ 21 करोड़ रुपये के सोने की डकैती के मामले में।पुलिस महीनों से इस हाई-प्रोफाइल केस की जांच में जुटी थी, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिल पा रहा था। फिर एक मामूली सड़क हादसा हुआ, जिसने पूरे रैकेट की परतें खोल दीं। इस एक्सीडेंट ने ऐसे सबूत दिए कि पुलिस सीधे लुटेरों के नेटवर्क तक पहुंच गई, जिनके तार बिहार से लेकर महाराष्ट्र तक फैले हुए था
घटना की शुरुआत
सोने से भरा वाहन और एक योजनाबद्ध डकैती यह मामला कुछ महीने पुराना है, जब मुंबई से चेन्नई जा रहा सोना लदा ट्रक रास्ते में गायब हो गया। वाहन में करीब 21 करोड़ रुपये मूल्य का सोना था, जिसे कुछ अज्ञात बदमाशों ने रास्ते में रोककर लूट लिया था।ड्राइवर को बंधक बनाकर लुटेरे ट्रक लेकर फरार हो गए और पुलिस के पास केवल कुछ धुंधली CCTV फुटेज रह गईं। कई राज्यों की पुलिस ने संयुक्त जांच शुरू की, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिला — जब तक कि एक छोटा एक्सीडेंट नहीं हुआ।
एक्सीडेंट बना पुलिस के लिए ‘गोल्डन हिंट’
घटना के कुछ हफ्ते बाद, महाराष्ट्र के नासिक इलाके में एक संदिग्ध कार का एक्सीडेंट हुआ। कार में बैठे दो युवक घायल हो गए। जब पुलिस ने औपचारिक जांच के लिए गाड़ी की तलाशी ली, तो अंदर से कई किलो सोने के गहने और बिस्किट बरामद हुए। पहली नजर में यह मामला सामान्य तस्करी जैसा लगा, लेकिन जब सोने पर लगे सीरियल नंबर मिलाए गए, तो रहस्य खुल गया — यह वही सोना था जो 21 करोड़ की डकैती में लूटा गया था।
बड़ी साजिश का पर्दाफाश
बिहार से महाराष्ट्र तक फैला नेटवर्क पुलिस ने घायल युवकों से पूछताछ शुरू की तो उन्होंने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। जांच में पता चला कि डकैती में कम से कम 9 लोग शामिल थे, जिनमें से कुछ बिहार के भागलपुर और गया के रहने वाले हैं, जबकि मुख्य सरगना महाराष्ट्र का है। डकैती की योजना बड़े ही पेशेवर तरीके से बनाई गई थी रूट की निगरानी की गई ट्रक के GPS को हैक किया गया और ड्राइवर को बेहोश कर दिया गया था लुटेरे लूट के बाद अलग-अलग राज्यों में भाग गए थे ताकि पुलिस को भ्रमित किया लेकिन एक्सीडेंट ने उनकी छिपी कहानी को उजागर कर दिया।
पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई: बिहार और महाराष्ट्र में छापेमारी एक्सीडेंट के बाद मिले सुराग के आधार पर पुलिस ने ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू की। सबसे पहले नासिक, पुणे और ठाणे में छापे मारे गए, जहां से दो आरोपी गिरफ्तार हुए। उनकी निशानदेही पर पुलिस की टीम बिहार के भागलपुर और पटना पहुंची और वहां से तीन और संदिग्धों को पकड़ा गया। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में सोने की रिकवरी और बाकी लूट के पैसे की जानकारी हासिल की। अब तक करीब 16 करोड़ रुपये मूल्य का सोना बरामद किया जा चुका है, जबकि बाकी की तलाश जारी है।
कैसे हुआ खुलासा
मोबाइल डेटा और GPS से मिला मजबूत सबूत आधुनिक तकनीक ने इस केस को सुलझाने में बड़ी भूमिका निभाई। पुलिस ने एक्सीडेंट के बाद मिले मोबाइल लोकेशन डेटा और GPS ट्रैकिंग के जरिये अपराधियों की गतिविधियों को ट्रेस किया। आरोपियों के फोन से मिले चैट रिकॉर्ड और बैंक लेनदेन ने साबित किया कि उन्होंने सोने की डील को कई हिस्सों में बांटकर बेचने की योजना बनाई थी।
पुलिस अधिकारियों का बयान
जांच अधिकारी के मुताबिक, यह मामला पूरी तरह से तकनीकी जांच और किस्मत के मेल से सुलझा है। अगर वह एक्सीडेंट न हुआ होता, तो शायद अपराधी आज भी खुले घूम रहे होते। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्य सरगना अब भी फरार है, लेकिन पुलिस उसकी लोकेशन ट्रैक कर रही है और जल्द गिरफ्तारी की उम्मीद है।


