पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत के निर्यात पर साफ दिखाई देने लगा है। खाड़ी मार्ग से होने वाली शिपिंग गतिविधियां बाधित हो रही हैं, जिसके चलते कई निर्यातकों की खेप बंदरगाहों पर अटक गई है। समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ी आशंकाओं के बीच अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने जहाजों की आवाजाही सीमित कर दी है, जिससे व्यापार की रफ्तार थम सी गई है।
जानकारी के मुताबिक, जोखिम बढ़ने के कारण शिपिंग कंपनियों ने ‘इमरजेंसी कॉन्फ्लिक्ट सरचार्ज’ या आपात संघर्ष शुल्क जोड़ दिया है। इस अतिरिक्त शुल्क से निर्यात लागत में भारी बढ़ोतरी हो रही है, जिसका सीधा असर छोटे और मध्यम उद्योगों पर पड़ रहा है। पेट्रोकेमिकल, इंजीनियरिंग सामान और कृषि उत्पादों के निर्यातकों ने कहा है कि बढ़ती लागत और देरी से उनके सौदे प्रभावित हो रहे हैं।
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व्यापार संगठनों ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है ताकि वैकल्पिक मार्गों और बीमा कवर के जरिए निर्यातकों को राहत दी जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खाड़ी क्षेत्र में तनाव लंबा खिंचता है तो इसका असर भारत के व्यापार संतुलन और विदेशी मुद्रा आय पर भी पड़ सकता है।


