दुनिया भर में बढ़ते ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को लेकर वैज्ञानिकों ने गंभीर चेतावनी दी है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक अगर कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन इसी रफ्तार से जारी रहा तो आने वाले वर्षों में करीब 1.16 अरब लोग गंभीर जलवायु जोखिम की चपेट में आ सकते हैं। बढ़ता तापमान, समुद्र स्तर में वृद्धि, भीषण गर्मी, सूखा और बाढ़ जैसी आपदाएं करोड़ों लोगों के जीवन और आजीविका को प्रभावित कर सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि एशिया और अफ्रीका के घनी आबादी वाले तटीय और निम्न-आय वाले क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। कृषि उत्पादन में गिरावट, जल संकट और स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी तेजी से बढ़ेगा। वैज्ञानिकों ने सरकारों से अपील की है कि वे स्वच्छ ऊर्जा, हरित तकनीक और कार्बन कटौती के ठोस कदम तुरंत लागू करें। अगर वैश्विक स्तर पर मिलकर उत्सर्जन कम नहीं किया गया, तो यह संकट आने वाली पीढ़ियों के लिए भयावह रूप ले सकता है।


