Gold Price Today: सोना-चांदी हुआ भारी सस्ता, धनतेरस से पहले कीमतों में बड़ी गिरावट; खरीदारी से पहले जानें जरूरी बातें
धनतेरस और दिवाली से पहले सोने-चांदी की कीमतों में आई बड़ी गिरावट ने सर्राफा बाजार का माहौल बदल दिया है। अक्टूबर के दौरान दोनों कीमती धातुओं के भाव में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। खास बात यह है कि चांदी की कीमत एक महीने में करीब 39,500 रुपये प्रति किलोग्राम नीचे आ गई, जबकि सोने के भाव में भी 8,600 रुपये से अधिक की गिरावट हुई। ऐसे में त्योहारों पर आभूषण खरीदने की तैयारी कर रहे परिवारों से लेकर निवेशकों तक के बीच बाजार को लेकर नई दिलचस्पी पैदा हुई है।
हालांकि, कीमतों में गिरावट को सीधे खरीदारी का संकेत मानना जल्दबाजी हो सकती है। सोने का बाजार अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों, डॉलर की मजबूती, ब्याज दरों और निवेशकों की मांग से प्रभावित होता है। इसलिए खरीदारों के लिए यह समझना जरूरी है कि मौजूदा गिरावट के पीछे कौन-से कारण हैं और आगे कीमतों की दिशा क्या हो सकती है।
अक्टूबर में सोने और चांदी की कीमतों में कितनी आई गिरावट?
इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 1 अक्टूबर 2026 को 24 कैरेट सोने का भाव 1,48,687 रुपये प्रति 10 ग्राम था। 30 अक्टूबर की शाम तक यह घटकर 1,40,054 रुपये पर पहुंच गया। इस तरह महीने के दौरान सोने की कीमत में 8,633 रुपये प्रति 10 ग्राम की कमी दर्ज की गई।
चांदी में गिरावट इससे भी अधिक रही। अक्टूबर की शुरुआत में एक किलोग्राम चांदी का भाव 2,20,829 रुपये था, जो महीने के अंत तक घटकर 1,81,344 रुपये रह गया। यानी एक महीने में चांदी करीब 39,485 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हुई।
यह गिरावट उन ग्राहकों के लिए राहत लेकर आई है, जो त्योहारों के दौरान आभूषण या चांदी के सिक्के खरीदने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, खरीदारी के समय स्थानीय बाजार का भाव, जीएसटी और मेकिंग चार्ज भी ध्यान में रखना होगा।
1 नवंबर को प्रमुख शहरों में सोने का भाव
उपलब्ध बाजार रिपोर्ट के मुताबिक, 1 नवंबर 2026 को प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोने की कीमतें इस प्रकार बताई गईं:
- दिल्ली: 1,39,030 रुपये प्रति 10 ग्राम
- जयपुर: 1,39,030 रुपये प्रति 10 ग्राम
- लखनऊ: 1,39,030 रुपये प्रति 10 ग्राम
- मुंबई: 1,38,880 रुपये प्रति 10 ग्राम
- चेन्नई: 1,38,880 रुपये प्रति 10 ग्राम
ध्यान रखें कि ये बताए गए बाजार भाव हैं। ज्वैलरी खरीदते समय अंतिम बिल में टैक्स और मेकिंग चार्ज जुड़ने से कीमत अलग हो सकती है। अलग-अलग दुकानों पर भी दरों में अंतर संभव है।
आखिर क्यों टूट रहे हैं सोने के भाव?
सोने की कीमतों पर केवल भारतीय बाजार की मांग का असर नहीं पड़ता। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजार में होने वाले बदलाव भी इसकी दिशा तय करते हैं।
दिए गए विश्लेषण के अनुसार, अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर बढ़ता रिटर्न सोने की कीमतों में गिरावट का एक प्रमुख कारण रहा। जब निवेशकों को सरकारी बॉन्ड जैसे विकल्पों से बेहतर ब्याज मिलने की संभावना दिखाई देती है, तब कुछ निवेशक सोने से पैसा निकालकर उन विकल्पों की ओर रुख करते हैं।
सोना अपने आप में ब्याज नहीं देता। इसलिए ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों का आकर्षण बढ़ने पर सोने की मांग पर दबाव आ सकता है। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की स्थिति, महंगाई की आशंकाएं और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियां भी सोने के अंतरराष्ट्रीय भाव को प्रभावित करती हैं।
यही वजह है कि भारतीय बाजार में सोने की कीमत समझने के लिए घरेलू मांग के साथ वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर भी नजर रखना जरूरी है।
क्या मौजूदा गिरावट के बाद सोना खरीदना फायदेमंद रहेगा?
यह सवाल इस समय सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। कीमतों में आई गिरावट ने निश्चित रूप से खरीदारी के लिए पहले की तुलना में कम भाव उपलब्ध कराए हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि सोना अब और सस्ता नहीं होगा।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सोना पोर्टफोलियो में विविधता लाने का एक माध्यम हो सकता है। आर्थिक अनिश्चितता, मुद्रा की कमजोरी और वैश्विक तनाव के दौर में इसकी मांग बढ़ सकती है। दूसरी ओर, ब्याज दरों और डॉलर में बदलाव के कारण कीमतों में दोबारा उतार-चढ़ाव भी संभव है।
विशेषज्ञों के विश्लेषण में किस्तों में निवेश करने की रणनीति को एकमुश्त बड़ी रकम लगाने की तुलना में बेहतर जोखिम प्रबंधन का विकल्प माना गया है। इससे किसी एक दिन के बाजार भाव पर पूरी खरीदारी निर्भर नहीं रहती।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी क्यों है महत्वपूर्ण?
सोने की लंबी अवधि की मांग को समझने के लिए केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी महत्वपूर्ण संकेत देती है। उपलब्ध विशेषज्ञ जानकारी के मुताबिक, 2026 की दूसरी तिमाही में केंद्रीय बैंकों ने कुल 289 टन सोना खरीदा। यह आंकड़ा बताता है कि कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद कुछ बड़े संस्थागत खरीदार सोने को अपने भंडार में शामिल कर रहे हैं।
केंद्रीय बैंक आमतौर पर विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने और आर्थिक जोखिमों से सुरक्षा के उद्देश्य से सोना रखते हैं। उनकी खरीदारी बाजार की लंबी अवधि की मांग को सहारा दे सकती है, हालांकि इससे कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी की गारंटी नहीं मिलती।
धनतेरस पर सोना खरीदने वालों के लिए पांच जरूरी सावधानियां
त्योहारों के दौरान भाव कम देखकर जल्दबाजी में खरीदारी करने के बजाय कुछ बातों पर ध्यान देना जरूरी है।
- हॉलमार्क जरूर देखें: आभूषण खरीदते समय BIS हॉलमार्क और HUID की जांच करें।
- मेकिंग चार्ज पूछें: अलग-अलग ज्वैलर्स के मेकिंग चार्ज में अंतर हो सकता है।
- अंतिम बिल समझें: सोने की कीमत, वजन, शुद्धता, जीएसटी और अन्य शुल्क अलग-अलग दर्ज होने चाहिए।
- निवेश और आभूषण में अंतर समझें: आभूषण खरीदने पर मेकिंग चार्ज और दोबारा बेचने की शर्तें भी मायने रखती हैं।
- बजट के अनुसार खरीदें: केवल कीमत गिरने के कारण कर्ज लेकर या जरूरी बचत खर्च करके सोना खरीदना उचित नहीं है।
आगे क्या हो सकता है बाजार का रुख?
आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतें अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर की चाल, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और त्योहारों की घरेलू मांग से प्रभावित हो सकती हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव बना रहता है तो कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। वहीं, सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने पर भाव को समर्थन भी मिल सकता है।
फिलहाल खरीदारों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि अक्टूबर की गिरावट को समझदारी से खरीदारी की योजना बनाने का अवसर मानें, न कि निश्चित मुनाफे की गारंटी। धनतेरस पर सोना खरीदना है तो बाजार भाव की तुलना, शुद्धता की जांच और अपने बजट का ध्यान रखना ही सबसे बेहतर तरीका रहेगा।




