‘घूसखोर पंडित’ नाम से प्रस्तावित फिल्म के एलान के बाद देश के कई हिस्सों में विवाद खड़ा हो गया। कुछ धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने फिल्म के शीर्षक और कथित विषयवस्तु पर आपत्ति जताते हुए इसे एक समुदाय की छवि को ठेस पहुंचाने वाला बताया। विरोध प्रदर्शन, ज्ञापन और सोशल मीडिया अभियान के जरिए फिल्म के नाम और कंटेंट पर रोक लगाने की मांग उठाई गई।
विवाद बढ़ने पर मामला अदालत तक पहुंचा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने निर्माताओं और याचिकाकर्ताओं दोनों से संयम बरतने को कहा। अदालत ने प्रारंभिक टिप्पणी में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि फिल्म की रिलीज से पहले उसकी वास्तविक सामग्री और प्रमाणन प्रक्रिया को ध्यान में रखा जाएगा।
फिलहाल ‘घूसखोर पंडित’ विवाद फिल्म इंडस्ट्री और समाज में बहस का विषय बना हुआ है। एक ओर निर्माता इसे सामाजिक व्यंग्य बता रहे हैं, तो दूसरी ओर विरोधी इसे आपत्तिजनक करार दे रहे हैं। अब सबकी नजर कोर्ट के अंतिम रुख और सेंसर बोर्ड की प्रक्रिया पर टिकी है।


