बहुत से लोगों को खून देखते ही चक्कर आने लगते हैं या वे बेहोश हो जाते हैं. यह सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन यह एक काफी आम समस्या है. अक्सर लोग इसे डर, कमजोरी या मानसिक घबराहट से जोड़ देते हैं, जबकि असल में यह शरीर की स्वाभाविक शारीरिक प्रतिक्रिया होती है. ज्यादातर मामलों में यह जानलेवा नहीं होती, लेकिन सही जानकारी न होने पर चोट लगने का खतरा जरूर बढ़ जाता है.
खून देखकर बेहोशी को मेडिकल भाषा में वासोवागल सिंकोप कहा जाता है. जब कोई व्यक्ति खून, चोट या किसी अचानक तनावपूर्ण स्थिति को देखता है, तो शरीर का नर्वस सिस्टम जरूरत से ज्यादा एक्टिव हो जाता है. इसके कारण दिल की धड़कन धीमी हो जाती है, ब्लड वैसल्स फैल जाती हैं, ब्लड प्रेशर गिर जाता है. इन सबका नतीजा यह होता है कि दिमाग तक पूरा ब्लड नहीं पहुंच पाता, और व्यक्ति को चक्कर आकर बेहोशी हो सकती है. यह डर से ज्यादा शरीर की ऑटोमैटिक प्रतिक्रिया है.
हमारा दिमाग लगातार ऑक्सीजन और खून की सप्लाई पर निर्भर करता है. जब किसी वजह से कुछ पलों के लिए यह सप्लाई कम हो जाती है, तो शरीर संकेत देने लगता है, जैसे सिर हल्का लगना, आंखों के आगे अंधेरा छाना, मतली, कमजोरी. अगर उस समय सही कदम न उठाए जाएं, तो व्यक्ति पूरी तरह बेहोश हो सकता है. शरीर व्यक्ति को जमीन पर लाने की कोशिश करता है ताकि दिमाग को दोबारा खून मिल सके.
यह समस्या ज्यादातर युवा और स्वस्थ लोगों में, लंबे समय तक खड़े रहने वालों में, कम पानी पीने वालों में, भूखे या थके हुए लोगों में पाई जाती है. करीब हर तीन में से एक व्यक्ति को ज़िंदगी में कभी न कभी बेहोशी का अनुभव हो सकता है. अच्छी बात यह है कि ज्यादातर मामलों में इसका दिल या दिमाग की गंभीर बीमारी से कोई संबंध नहीं होता है.
सिर्फ खून ही नहीं, बल्कि कई और कारण भी इस प्रतिक्रिया को बढ़ा सकते हैं. जैसे चोट या मेडिकल प्रक्रिया देखना, अचानक खड़े हो जाना, लंबे समय तक खड़े रहना, पानी की कमी, तेज भावनात्मक तनाव, बहुत ज्यादा थकान. हर व्यक्ति में इसकी तीव्रता अलग हो सकती है. कोई सिर्फ चक्कर महसूस करता है, तो कोई बेहोश हो जाता है.
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अक्सर बेहोशी अचानक नहीं होती, बल्कि उससे पहले शरीर संकेत देता है. इन्हें पहचानना बहुत जरूरी है. चक्कर आना, ठंडा पसीना आना, धुंधला दिखाई देना,कानों में आवाज गूंजना, मतली और स्किन का पीला पड़ना. अगर इन संकेतों को समय पर समझ लिया जाए, तो बेहोशी से बचा जा सकता है.
जैसे ही ऐसा लगे कि चक्कर आ रहा है तो तुरंत लेट जाएं और पैरों को ऊपर उठा लें, अगर लेटना संभव न हो, तो बैठकर सिर घुटनों के बीच रखें, तंग कपड़े ढीले करें, गहरी और धीमी सांस लें, पैरों और हाथों की मांसपेशियों को कसें. ये उपाय दिमाग तक खून पहुंचाने में मदद करते हैं और बेहोशी को टाल सकते हैं.
अधिकतर मामलों में यह समस्या खतरनाक नहीं होती लेकिन डॉक्टर से जरूर संपर्क करें अगर बार-बार बिना वजह बेहोशी हो, बेहोशी के साथ सीने में दर्द या सांस फूलना हो, गिरकर गंभीर चोट लग जाए. साथव ही भरपूर पानी पिएं, समय पर खाना खाएं, लंबे समय तक खड़े रहने से बचें, जिन चीजों से समस्या होती है, उनसे सावधानी रखें, जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से एक्सपोजर थेरेपी लें.


