सरकार ने FASTag Annual Pass Scam को लेकर चेतावनी जारी की है। साइबर अपराधी FASTag एनुअल पास के डिस्काउंट के नाम पर लोगों के साथ फ्रॉड कर रहे हैं। NHAI ने एक ऐसा ही स्कैम हाल ही में डिटेक्ट किया है। स्कैमर्स डिस्काउंट के नाम पर FASTag यूजर्स को टारगेट कर रहे हैं। सस्ते FASTag रिचार्ज के नाम पर कई लोग स्कैमर की जाल में फंस रहे हैं। स्कैमर्स लोगों के बैंक डिटेल्स निकालर फ्रॉड कर रहे हैं। गृह मंत्रालय के साइबर सिक्योरिटी विंग I4C ने अपने आधिकारिक X हैंडल से इसे लेकर एक एडवाइजरी जारी की है। I4C ने डिस्काउंट के नाम पर हो रहे FASTag Scam को लेकर लोगों को आगाह करते हुए इसके बचने के लिए कहा है।
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कैसे हो रहा स्कैम?
स्कैमर्स ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और IHMCL के नाम और लोगो का गलत तरीके से इस्तेमाल करके एक फर्जी वेबसाइट क्रिएट की है, जो देखने में ऑफिशियल वेबसाइट की तरह ही लगती है।
इसके बाद लोगों को Facebook, Instagram, X जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर विज्ञापन दिखाकर फर्जी वेबसाइट की लिंक को टॉप में रखा जाता है। इस लिंक पर क्लिक करने के बाद लोगों से गाड़ी नंबर, FASTag ID, मोबाइल नंबर और बैंकिंग डिटेल्स मांगी जाती है। इसके बाद पेमेंट करने के लिए कहा जाता है।
जैसे ही लोग FASTag Annual Pass के लिए पेमेंट करते हैं वो राशि स्कैमर के पास पहुंच जाती है। साथ ही, उन्हें कोई वैलिड FASTag Annual Pass जारी नहीं होता है। ऐसे फर्जी लिंक पर क्लिक करने पर लोगों की बैंकिंग डिटेल्स स्कैमर्स के हाथ लग जाती है और वो फ्रॉड का शिकार हो सकते हैं।
इस नए Scam से कैसे बचें?
- इस Scam से बचने के लिए सरकार ने एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने लोगों को FASTag Annual Pass के लिए अधिकृत Rajmargyatra मोबाइल ऐप या फिर NHAI की आधिकारिक वेबसाइट का इस्तेमाल करने के लिए कहा है। FASTag का यह एनुअल पास इसके अलावा अधिकृत बैकिंग चैनल पर उपलब्ध है।
- सोशल मीडिया पर दिखने वाले किसी भी डिस्काउंट ऐड पर क्लिक न करें। इस तरह के डिस्काउंट वाले ऐड भ्रामक हो सकते हैं और आपको इसका नुकसान हो सकता है।
- Google Search में First Result हमेशा Authentic नहीं होता है। ऐसे में आपको ऐसे लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए।
- किसी भी Unverified वेबसाइट पर OTP, FASTag ID, गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर या बैंकिग डिटेल शेयर न करें।
- अगर, आप गलती से साइबर फ्रॉड का शिकार हो जाते हैं तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या साइबर क्राइम की वेबसाइट पर रिपोर्ट करें।


