प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़ा बड़ा मामला सामने आया है। एजेंसी के मुताबिक 23 हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में करीब 14,105 घर खरीदारों से कुल 4,619 करोड़ रुपये वसूले गए, लेकिन इसके बावजूद लोगों को समय पर फ्लैट नहीं मिल सके। कई खरीदारों को अपने घर के लिए 16 से 18 साल तक इंतजार करना पड़ा, जिससे हजारों परिवार आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना कर रहे हैं।
ईडी की जांच में सामने आया कि बिल्डरों ने खरीदारों से बड़ी रकम लेने के बावजूद परियोजनाओं को समय पर पूरा नहीं किया। आरोप है कि कुछ मामलों में फंड का इस्तेमाल दूसरे प्रोजेक्ट्स या अन्य गतिविधियों में किया गया, जिससे निर्माण कार्य लंबा खिंचता चला गया। एजेंसी अब इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से भी जांच कर रही है।
इस खुलासे के बाद प्रभावित घर खरीदारों को उम्मीद जगी है कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई से उन्हें न्याय मिलेगा और लंबे समय से अटके उनके फ्लैट का समाधान निकल सकेगा। वहीं सरकार और नियामक संस्थाओं पर भी रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और खरीदारों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ गया है।


