(लग्जरी हाउसिंग में 40% वृद्धि | अफोर्डेबल हाउसिंग 26% महंगी)
भारत के रियल एस्टेट बाजार ने 2024–25 की अवधि में तेज़ी से वृद्धि दर्ज की। इस दौरान जहाँ लग्जरी हाउसिंग सेगमेंट में कीमतें 40% तक बढ़ीं, वहीं अफोर्डेबल होम्स भी 26% महंगे हुए। यह वृद्धि देश के आर्थिक परिदृश्य, शहरीकरण, निवेश रुझान और निर्माण लागत के बदलते समीकरणों को दर्शाती है।
सेगमेंटवार मूल्य वृद्धि
| हाउसिंग श्रेणी | कीमतों में वृद्धि | प्रमुख कारण |
|---|---|---|
| लग्जरी हाउसिंग | 40% | हाई-नेटवर्थ निवेश, लोकेशन की कमी, NRI डिमांड |
| अफोर्डेबल हाउसिंग | 26% | लागत वृद्धि, भूमि दरें, टैक्स, आपूर्ति की कमी |
लग्जरी हाउसिंग बाजार: तेज़ी के मुख्य कारण
3.1 उच्च-आय वर्ग में वृद्धि
IT, स्टार्टअप्स, BFSI सेक्टर की आय में उछाल
बड़े शहरों में मिलेनियल और NRI निवेशकों की बढ़ती हिस्सेदारी
3.2 लोकेशन और प्रीमियम प्रोजेक्ट्स की कमी
मेट्रो शहरों में जमीन की उपलब्धता कम
सीमित supply + बढ़ती demand = कीमतें तेजी से ऊपर
3.3 निवेश का सुरक्षित विकल्प
स्टॉक मार्केट की अस्थिरता के बीच रियल एस्टेट “सुरक्षित संपत्ति” के रूप में उभरा
विदेशों की तुलना में भारत में बेहतर रिटर्न
अफोर्डेबल हाउसिंग में महंगाई के कारण
4.1 निर्माण सामग्री की बढ़ी लागत
सीमेंट, स्टील, वायर, टाइल्स की कीमतें 8–22% तक बढ़ीं
लागत का सीधा असर अंतिम कीमत पर
4.2 भूमि दरों में वृद्धि
टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी भूमि मूल्य 15–30% बढ़ा
सरकार की इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं ने लागत को और बढ़ाया
4.3 सरकारी शुल्क और लेबर लागत
विभिन्न राज्यों में स्टाम्प ड्यूटी/रजिस्ट्रेशन शुल्क बढ़ा
श्रमिकों की मजदूरी 12–18% बढ़ी
खरीदारों पर प्रभाव
5.1 EMI और डाउनपेमेंट में बढ़ोतरी
15–20 लाख वाली अफोर्डेबल यूनिट अब 18–24 लाख तक पहुंच गई
80 लाख वाली लग्जरी यूनिट 1–1.3 करोड़ तक
5.2 मिडिल क्लास की चुनौती
2BHK लेना मुश्किल
परिधीय/उपनगरीय क्षेत्रों की ओर पलायन बढ़ा
5.3 रेंटल मार्केट पर प्रभाव
किराए में 10–20% बढ़ोतरी देखी गई
प्रवासी व युवा कर्मचारियों पर बोझ
डेवलपर्स और बाजार विशेषज्ञों का दृष्टिकोण
6.1 मांग आने वाले वर्ष में भी बनी रहने की संभावना
ब्याज दरों में थोड़ी स्थिरता
इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार (मेट्रो, हाईवे) से कीमतें और बढ़ सकती हैं
6.2 लग्जरी सेगमेंट में सबसे तेज़ वृद्धि जारी
ब्रांडेड डेवलपर्स और हाई-हाई राइज प्रोजेक्ट्स की मांग बढ़ती होगी
6.3 अफोर्डेबल सेगमेंट पर सरकारी हस्तक्षेप जरूरी
PMAY जैसी योजनाओं को पुनर्जीवित करने की मांग
GST रियायत और सरकारी भूमि के उपयोग की सिफारिश
अगले 12 महीनों का संभावित ट्रेंड (Forecast)
| सेगमेंट | संभावित वृद्धि | टिप्पणी |
|---|---|---|
| लग्जरी हाउसिंग | 8–15% | मांग मजबूत रहेगी |
| अफोर्डेबल हाउसिंग | 5–10% | लागत आधारित वृद्धि जारी |
| मिड-सेगमेंट | 6–12% | मांग स्थिर, सप्लाई सीमित |
भारत का रियल एस्टेट बाजार अलग-अलग गति से बढ़ रहा है।
लग्जरी सेगमेंट में रिकॉर्ड तोड़ तेजी जारी है।
अफोर्डेबल हाउसिंग की महंगाई मध्यम और निम्न आय वर्ग के लिए सबसे बड़ी चिंता बन गई है।
अगले वर्ष भी कीमतें स्थिर रहने की बजाय बढ़ने की ही संभावना अधिक है।
सरकार और डेवलपर्स द्वारा संयुक्त प्रयास ही आम घर खरीदारों के लिए राहत ला सकते हैं।


