रायपुर। छत्तीसगढ़ में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए राज्य सरकार बजट सत्र में ‘छत्तीसगढ़ लोक परीक्षा अधिनियम’ लाने जा रही है। इस प्रस्तावित कानून के तहत यदि कोई परीक्षार्थी भर्ती परीक्षा में नकल करते पकड़ा जाता है तो उसे एक से पांच साल तक की जेल और 5 लाख रुपए तक जुर्माना हो सकता है। वहीं नकल करवाने वाले व्यक्ति या गिरोह पर और कड़ी कार्रवाई करते हुए जेल के साथ 1 करोड़ रुपए तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विधानसभा में कहा है कि भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी रोकने के लिए सरकार सख्त कानून लाने के लिए प्रतिबद्ध है। वर्ष 2025 में छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल की एक भर्ती परीक्षा के दौरान बिलासपुर केंद्र में हाईटेक नकल का मामला सामने आया था, जिसके बाद इस तरह के कड़े प्रावधानों की जरूरत महसूस की गई।
अधिनियम के अनुसार, नकल करते पाए गए अभ्यर्थी का परिणाम निरस्त किया जाएगा और उसे 3 से 5 वर्ष तक राज्य की किसी भी भर्ती परीक्षा में शामिल होने से प्रतिबंधित किया जा सकेगा। गंभीर मामलों में जेल और आर्थिक दंड दोनों लागू होंगे। दोबारा दोषी पाए जाने पर सजा बढ़ाकर 10 वर्ष तक की जा सकती है।
कोचिंग संस्थानों को भी अधिनियम के दायरे में लाया जाएगा। कोई भी संस्थान सफलता की गारंटी या भ्रामक विज्ञापन नहीं दे सकेगा। हालांकि शैक्षणिक और तकनीकी परीक्षाएं इस कानून के दायरे से बाहर रहेंगी। सरकार का मानना है कि यह कानून नकल, पेपर लीक और भर्ती घोटालों पर प्रभावी रोक लगाएगा।


