आज से चैत्र नवरात्रि और गुड़ी पड़वा: घटस्थापना का शुभ समय, 9 रंग और फास्ट नियम पूरी गाइड
धर्म डेस्क। 19 मार्च 2026 से चैत्र नवरात्रि और गुड़ी पड़वा का पावन पर्व शुरू हो रहा है। इसी दिन से हिंदू नववर्ष यानी विक्रम संवत 2083 का भी आरंभ होता है। यह दिन नए संकल्प, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक साधना की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। आइए जानते हैं घटस्थापना का शुभ मुहूर्त, नवरात्रि के 9 रंग, पूजा विधि और व्रत के नियम।
🕉️ घटस्थापना (कलश स्थापना) का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार प्रतिपदा तिथि 19 मार्च सुबह 6:52 बजे से शुरू होकर 20 मार्च सुबह 4:52 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर 19 मार्च को ही घटस्थापना की जाएगी।
प्रातःकाल मुहूर्त: सुबह 06:52 – 07:43 बजे
शुभ चौघड़िया: सुबह 06:26 – 07:57 बजे
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:05 – 12:53 बजे
गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:35 – 06:59 बजे
🌈 नवरात्रि 2026 के 9 रंग (Day-wise Colors)
नवरात्रि के नौ दिनों में अलग-अलग रंगों का विशेष महत्व होता है:
पीला (मां शैलपुत्री) – ऊर्जा और खुशी
हरा (मां ब्रह्मचारिणी) – विकास और शांति
ग्रे (मां चंद्रघंटा) – संतुलन
नारंगी (मां कूष्मांडा) – सकारात्मकता
सफेद (मां स्कंदमाता) – पवित्रता
लाल (मां कात्यायनी) – शक्ति
रॉयल ब्लू (मां कालरात्रि) – ज्ञान
गुलाबी (मां महागौरी) – प्रेम
बैंगनी (मां सिद्धिदात्री) – आध्यात्मिकता
🚩 माता का वाहन 2026
इस वर्ष नवरात्रि गुरुवार से शुरू हो रही है, इसलिए मां दुर्गा का वाहन पालकी (डोली) माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह वाहन बदलाव और चुनौतियों के संकेत देता है।
🎉 गुड़ी पड़वा और हिंदू नववर्ष 2083
गुड़ी पड़वा महाराष्ट्र में नववर्ष के रूप में मनाया जाता है, जबकि देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे अलग नामों से जाना जाता है—उगादी, युगादि, नवरेह आदि।
गुड़ी बांधने/ध्वज फहराने का समय: सुबह 05:15 – 07:57 बजे
अभिजीत मुहूर्त: 12:05 – 12:53 बजे
🙏 पहले दिन की पूजा विधि
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है।
कलश स्थापना कर दीपक जलाएं
दुर्गा सप्तशती का पाठ करें
“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” मंत्र का जाप करें
माता को गाय के घी का भोग लगाएं
🥗 नवरात्रि व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं
क्या खाएं:
फल, दूध और सात्विक भोजन
साबूदाना, कुट्टू और सिंघाड़ा आटा
क्या नहीं खाएं:
प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन
बासी खाना
निष्कर्ष:
चैत्र नवरात्रि और गुड़ी पड़वा का यह पर्व आस्था, ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक है। श्रद्धा और नियमों के साथ पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता आती है।


