रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल प्रेम संबंध टूटना या शादी से इनकार करना, अपने आप में आत्महत्या के लिए उकसाने (आईपीसी की धारा 306) का पर्याप्त आधार नहीं है। जस्टिस संजय एस अग्रवाल की एकलपीठ ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए सत्र न्यायालय द्वारा आरोपी को दी गई दोषमुक्ति को बरकरार रखा।
मामला बिलासपुर जिले के चकरभाठा थाना क्षेत्र से जुड़ा है। वर्ष 2016 में एक युवती ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस ने उसके मित्र सुनील कुमार साहू के खिलाफ शादी से इनकार करने के कथित आरोप के आधार पर धारा 306 के तहत अपराध दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था।
ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष युवती को आत्महत्या के लिए आरोपी द्वारा उकसाए जाने का ठोस और प्रत्यक्ष प्रमाण पेश नहीं कर सका। प्रस्तुत सुसाइड नोट में भी आरोपी के खिलाफ स्पष्ट आरोप दर्ज नहीं था। गवाहों के बयान में प्रेम संबंध की पुष्टि हुई, लेकिन प्रत्यक्ष दुष्प्रेरण का साक्ष्य नहीं मिला।
निचली अदालत ने 23 जनवरी 2017 को आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 306 के तहत दोषसिद्धि के लिए आरोपी की प्रत्यक्ष और सक्रिय भूमिका का स्पष्ट प्रमाण आवश्यक है, जो इस मामले में अनुपस्थित था।


