भारतीय सोलर उद्योग को बड़ा झटका देते हुए United States Department of Commerce ने भारत से आयात होने वाले सोलर सेल और पैनल पर 125.87% काउंटरवेलिंग ड्यूटी (CVD) लगाने का फैसला किया है। भारत के अलावा इंडोनेशिया पर 104.38% और लाओस पर 80.67% ड्यूटी तय की गई है।
अमेरिकी सरकार का तर्क है कि इन देशों की कंपनियों को सरकारी सब्सिडी मिलती है, जिससे अमेरिकी निर्माताओं को नुकसान होता है। यह कार्रवाई अमेरिकी सोलर कंपनियों के समूह Alliance for American Solar Manufacturing and Trade की याचिका के बाद की गई है। इस गठबंधन में Hanwha Qcells, First Solar और Mission Solar जैसी कंपनियां शामिल हैं।
दो चरणों में फैसला
यह प्रारंभिक निर्णय है। अगले चरण में कॉमर्स डिपार्टमेंट यह जांच करेगा कि क्या संबंधित कंपनियों ने उत्पाद उत्पादन लागत से कम कीमत पर बेचे। यदि डंपिंग साबित होती है, तो अतिरिक्त एंटी-डंपिंग ड्यूटी भी लग सकती है।
किन कंपनियों पर असर
भारत की Mundra Solar पर 125.87% ड्यूटी लागू की गई है। इंडोनेशिया की PT Blue Sky Solar पर 143.3% और PT REC Solar Energy पर 85.99% ड्यूटी तय हुई है। लाओस की SolarSpace Technology सहित कुछ अन्य कंपनियां भी 80.67% की दर से प्रभावित होंगी।
वैश्विक प्रभाव
अमेरिका पहले भी मलेशिया, वियतनाम, थाईलैंड और कंबोडिया से सोलर आयात पर सख्ती कर चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नए फैसले से वैश्विक सोलर सप्लाई चेन में फिर बदलाव आ सकता है। भारतीय निर्यातकों के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है, हालांकि अंतिम निर्णय के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।


