जशपुर। संयुक्त मंच के आह्वान पर छत्तीसगढ़ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ के बैनर तले आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं तीन सूत्रीय मांगों को लेकर दो दिवसीीय हड़ताल पर उतर आईं। कार्यकर्ताओं ने जशपुर के रणजीता स्टेडियम स्थित धरना स्थल पर एकत्र होकर जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया। 26 एवं 27 फरवरी को प्रदेशभर में आंगनबाड़ी केंद्र बंद रखकर आंदोलन को सफल बनाने का दावा किया गया।
संघ की जिलाध्यक्ष श्रीमती कविता यादव ने केंद्र और राज्य सरकार पर बजट में अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आईसीडीएस योजना के 50 वर्ष पूरे होने के बावजूद कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को सम्मानजनक मानदेय व सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। वर्तमान में कार्यकर्ता को 4500 रुपये और सहायिका को 2250 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिए जाने को उन्होंने अपर्याप्त बताया। उनका कहना है कि 2018 के बाद से मानदेय में कोई वृद्धि नहीं हुई है और राज्य सरकार ने भी बजट में कोई राहत नहीं दी।
संघ ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं—आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं को शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए, नियमितीकरण तक कार्यकर्ता को 26 हजार और सहायिका को 22,100 रुपये मासिक वेतन दिया जाए तथा सामाजिक सुरक्षा के तहत पेंशन, ग्रेच्युटी और समूह बीमा की सुविधा प्रदान की जाए। मांगें पूरी नहीं होने पर 9 मार्च को रायपुर में विधानसभा घेराव की चेतावनी दी गई है।


