बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों से जुड़े एक अहम मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को अपने निजी घर में शांतिपूर्वक प्रार्थना सभा आयोजित करने के लिए प्रशासन से पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है।
न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकलपीठ ने पुलिस द्वारा जारी नोटिसों को रद्द करते हुए इसे नागरिक अधिकारों में अनावश्यक हस्तक्षेप माना। कोर्ट ने कहा कि घर के भीतर शांतिपूर्ण प्रार्थना पर कोई कानूनी प्रतिबंध नहीं है और केवल प्रार्थना के आधार पर किसी को परेशान नहीं किया जा सकता।
मामला जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ थाना क्षेत्र के गोधना गांव से जुड़ा है, जहां याचिकाकर्ता 2016 से अपने घर में प्रार्थना सभा आयोजित कर रहे थे। पुलिस द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 94 के तहत बार-बार नोटिस जारी कर इसे रोकने की कोशिश की जा रही थी।
हाईकोर्ट ने 18 अक्टूबर 2025, 22 नवंबर 2025 और 1 फरवरी 2026 को जारी सभी नोटिसों को निरस्त कर दिया। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी सभा से कानून-व्यवस्था या शोर-शराबे की स्थिति उत्पन्न होती है, तो प्रशासन नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है, लेकिन बिना कारण नागरिक अधिकारों में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।


