भारत में सूखे का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसकी मुख्य वजह तपती जलवायु, अनियमित वर्षा और तेजी से हो रहा भूजल दोहन है। India के कई राज्यों में इस साल सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे खेती और जल संसाधनों पर सीधा असर पड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के चलते मानसून का पैटर्न बदल रहा है, जिससे सूखे की स्थिति और गंभीर होती जा रही है।
भूजल का अत्यधिक इस्तेमाल भी इस संकट को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है। कृषि और घरेलू जरूरतों के लिए लगातार हो रही पानी की निकासी से जलस्तर तेजी से गिर रहा है। खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट गहराता जा रहा है, जिससे लोगों को लंबी दूरी तय कर पानी लाना पड़ रहा है। इसके साथ ही, सूखे की वजह से फसल उत्पादन पर असर पड़ रहा है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस संकट से निपटने के लिए जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और टिकाऊ खेती के तरीकों को अपनाना बेहद जरूरी है। सरकार और स्थानीय प्रशासन भी जल प्रबंधन को लेकर कई योजनाएं चला रहे हैं, लेकिन बढ़ते खतरे को देखते हुए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में सूखा देश के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।


