एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत के पास पर्याप्त टैक्स बफर मौजूद है, जिससे देश 110 डॉलर प्रति बैरल तक कच्चे तेल की कीमतों को संभालने की क्षमता रखता है। रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले करों की संरचना सरकार को कीमतों में उतार-चढ़ाव के दौरान कुछ राहत देती है, जिससे अचानक बढ़ी वैश्विक कीमतों का पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर डालने की जरूरत नहीं पड़ती।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के पास एक्साइज ड्यूटी और अन्य करों में समायोजन करने का विकल्प रहता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर भी घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित किया जा सकता है। इससे महंगाई पर पड़ने वाले असर को भी कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती हैं, तब भी भारत के पास करों में बदलाव और नीति उपायों के जरिए स्थिति को संभालने की गुंजाइश बनी रहेगी। हालांकि लंबे समय तक ऊंची कीमतें बनी रहने पर सरकार को अतिरिक्त आर्थिक कदम उठाने पड़ सकते हैं।


